अल्फ़ाज़ हैं कुछ…

आजकल अल्फ़ाज़ हैं कुछ बिखरे- बिखरे
कितने भी समेंटूं गज़ल नहीं बनती।

Comments

9 responses to “अल्फ़ाज़ हैं कुछ…”

    1. धन्यवाद

    1. धन्यवाद

  1. बहुत सुंदर पंक्तियां

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