अश्क और लिबास

शायद मेरे ज़नाज़े के पीछे
अश्क बहाती हुई कोई आ रही है।
एक झलक देखें तो किस लिबास में
मेरी ज़नाज़े के संग आ रही है।।

Comments

3 responses to “अश्क और लिबास”

  1. अति सुन्दर, भाव पूर्ण पंक्तियाँ

    1. Praduman Amit

      समीक्षा का स्वागत है।

  2. बहुत सुन्दर 

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