शायद मेरे ज़नाज़े के पीछे
अश्क बहाती हुई कोई आ रही है।
एक झलक देखें तो किस लिबास में
मेरी ज़नाज़े के संग आ रही है।।
अश्क और लिबास

Comments
3 responses to “अश्क और लिबास”
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अति सुन्दर, भाव पूर्ण पंक्तियाँ
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समीक्षा का स्वागत है।
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बहुत सुन्दर
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