अश्क बेपरवाह बहे जाते है

अश्क बेपरवाह बहे जाते है

एक कहानी है

ये जो कहे जाते है

कोई सुनता ही नहीं

कोई ठहरता ही नहीं

आते है लोग, चले जाते है

अश्क बेपरवाह बहे जाते है

 

आंखो से बहकर आसूं

आ जाते है रूखसारो पर

छोड कर खारी लकीरे,

अपने अनकहे अहसासों की

न जाने कहां गुम जो जाते है

अश्क बेपरवाह बहे जाते है

Comments

3 responses to “अश्क बेपरवाह बहे जाते है”

  1. Pankaj Soni Avatar
    Pankaj Soni

    बेहतरीन अल्फ़ाज …….पन्ना भाई

  2. Satish Pandey

    छोड कर खारी लकीरे,

    अपने अनकहे अहसासों की

    न जाने कहां गुम जो जाते है

    अश्क बेपरवाह बहे जाते है
    बेहतरीन

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