मेरे भावों में हो संवेदनाएं
इरादा ना हो
किसी को ठेस पहुंचाने का
मलिन हो जाए चाहे तन के कपड़े
इरादा ना हो दिल में मैल रखने का
विश्वास से भरा हो हर रिश्ता
कोई वचन ना बोलूं दिल दुखाने का
मैं स्वयंभू हूं, मैं ही ब्रह्मा हूं
अहंकार ना आए कभी,
आसमान पर छा जाने का।।
अहंकार ना आए कभी
Comments
4 responses to “अहंकार ना आए कभी”
-
अति सुन्दर प्रस्तुति
-

धन्यवाद
-
-
अतिसुंदर रचना
-

सुंदर
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.