अहम् का फासला

अलफाजो का अहम् किरदार रहा
हमारी नजदीकियाँ मिटाने में
कभी हम कभी अतःम
नासमझ बन बैठे
दूरियाँ बढाने में ।
ना मेरी कोशिश रही
तुझे मनाने की
ना तुम मुझे
विश्वास दिला पाये
एक मद् का फासला रहा
एक- दूसरे को समझाने में ।

Comments

5 responses to “अहम् का फासला”

  1. Rishi Kumar

    वाह सुमन जी
    👌✍✍❤

  2. Suman Kumari

    “कभी हम कभी तुम” पढा जाए

    1. सादर आभार

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