आँखों में घुमड़ते बादल
कुछ कुछ कम होने लगे हैं,
रास्तों में काई बिछाकर
विदाई के निशान छोड़ने लगे हैं।
फिसलन बहुत अधिक है,
चप्पल का तल अलग से घिसा है,
हाँ या ना के बीच
मेरी चाहत, मेरा प्यार पिसा है,
आँखों से फिर दो बूँद जल रिसा है,
यह मेरी मुहब्बत की निशा है,
अँधेरे में, फिसलन में ,
गिरता हूँ , उठता हूँ
उठ उठ कर गिरता हूँ ,
गिर-गिर कर उठता हूँ ,
सवेरा जल्दी हो जाए
इसी आशा में रहता हूँ।
आँखों में घुमड़ते बादल
Comments
7 responses to “आँखों में घुमड़ते बादल”
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Very nice
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Thanks ji
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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उत्साहवर्धन हेतु सादर धन्यवाद जी
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मन के भावों का यथार्थ चित्रण।
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भाव की गहराई तक पहुंचने हेतु सादर धन्यवाद
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सुस्वागतम् 🙏
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