आँखों ही आँखों में
आँखों ही आँखों में, जाने कब बड़ी हो जाती है
देखते ही देखते, वो घड़ी भी आ जाती है
न चाहते हुए भी, अपने दिल के टुकड़े को
खुद से जुदा करने की, बारी आ जाती है
कैसा होता है ये पल, उस पिता के लिए
बस अंदर ही अंदर भावनाएँ, दबा दी जाती हैं
कल जिस घर आँगन, खेलती कूदती थी
आज उसी आँगन से विदा की जाती है
लड़ती थी ,जिन चीजों के लिए
आज बिन बोले, यूँ ही छोड़ जाती है
रोने न देती थी, किसी को भी एक पल
आज सबको रोता बिलखता, छोड़ चली जाती है।।
Wow!
थैंक यू
Nice
Thank u
Nice
थैंक्यू
मार्मिक
भावनाशील
Heart tuching
सच्ची में!
Hun
Thank u so much to all of u
Pyari kavita
नेहा जी बहुत सुंदर