देखो आई सुहानी होली।
कैसी रंगों की रंगी रंगोली।।
कण-कण में नया उल्लास है।
आज धरती बनी रे खास है।।
लाओ रंगों की भर-भर झोली।
सब मिलकर हम खलेंगे होली।।
देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।।
नहीं काला रहे नहीं गोरा रहे।
लाल पीले हरे छोरी छोरा रहे।।
आज कोयल भी बनीं हंसोली।
सब मस्ती में मस्त नव टोली।।
देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।।
न कोई राजा रहा न कोई रानी रही।
सिर्फ खुशियाँ खुशी मस्तानी रही।।
बाँह-बाँहों की बन गई डोली।
हर तरफ है मस्ती की बोली।।
देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई।
लगते गले बन भाई-भाई।।
देख ‘विनयचंद ‘ की लेखनी बोली।
धवल मुख स्याह रंग से प्यार की बोली।।
देखो आई सुहानी होली। कैसे रंगों की रंगी रंगोली।।
आई सुहानी होली
Comments
25 responses to “आई सुहानी होली”
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Kya baat h
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Wow great writing
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Nyc
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Nice
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गुड
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Woww
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Sunder
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Achchha hai
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Holii mubarak
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Nice
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Good panditji
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Holi mubarak panditji
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Sunder panditji
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Holi mubarak panditji
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वाह वाह पंडित जी क्या खूब लिखा है आपने।होली मुबारक
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Nice
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Nice 👌👌🙏
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Holi mubarak pandit ji. Very nice lines
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Happy holi
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Wow bahut badhiya poem h
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अद्भुत
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Servshreshth kavita vinay bihari ji
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Nice
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Thanksgiving all of you
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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