काव्य प्रतियोगिता

चितचोर सावन

ए साजन आम के बाग में, झूला लगा दे। अब की बरस सावन के मधुर गीत सुना दे। रिमझिम बारिश में भीगे है मेरा तन बदन मोरनी की भाँति मै बलखाउँ ऐसा एक धून बजा दे। चारो तरफ के रुत है प्रेम – ए- इकरार के सतरंगी रंग मन को लूभाए इन्ही रंगो से मुझे सजा दे। जब से सावन आए आए दिन बहार के प्रेम रस की मै प्यासी बस एक घूँट पिला दे। नींद चुराए चितचोर सावन के महीना इन झूलो की कतारो में मेरा भी झूला लगा दे। »

सावन के फुहार

पतझर के मौसम उस पे बसंत बहार आसमान से बरसे सावन के फुहार। कहीं मन जले कहीं ख्वाबो के आशियाना जले यही मौसम में होता है अपनो से अपनो का प्यार।। बिन पायल के पग में घूंघरू बजे कोयल की बोली साजन के याद दिलाये बड़ा दर्द जगाता है सावन के फुहार। »

ऐसा भारत बनाए

कविता ऐसा एक भारत बनाए नैतिकता क अभाव में, हमने जो स्वच्छता को अपनो से अलग किया। तरह तरह के बीमारियों को गले लगा कर, अपना अनमोल जीवन नष्ट किया।। आओ हिन्द देश के निवासी, स्वच्छता के एक नया संसार बनाए। चारो दिशाओं में हो हरियाली ही हरियाली ऐसा एक भारत बनाए।। »

ऐसा भारत बनाए

कविता ऐसा एक भारत बनाए नैतिकता क अभाव में, हमने जो स्वच्छता को अपनो से अलग किया। तरह तरह के बीमारियों को गले लगा कर, अपना अनमोल जीवन नष्ट किया।। आओ हिन्द देश के निवासी, स्वच्छता के एक नया संसार बनाए। चारो दिशाओं में हो हरियाली ही हरियाली ऐसा एक भारत बनाए।। »

कोरोना से डरा ना

कविता कोरोना से डरो ना स्वच्छता को अपनाओ, कोरोना को ठेंगा दिखाओ। जहाँ से आया हमारे देश में, उसे वहाँ भगाओ।। चारो तरफ मचा दिया कोहराम, परेशान हो गए हैं हम। महाकाल न रहे हमारे बीच, ऐसा एक माहौल बनाए।। समस्त नियम के पालन कर के, हम उस पर हावी हो जाए। मिटा सके न हम सब को, ऐसा एक पर्यावरण बनाओ।। बहुत सह लिए दर्द, अब दर्द हम से सहा नहीं जाता। स्वच्छता के हथियार बना कर, कोरोना पर तोप चलाओ।। कहे “प्र... »

स्वच्छता

स्वच्छता के डगर पे, देशवासीयो दिखाओ चल के। करोना भागेगा डर से, तुम और हम ही योद्धा है आज के।। पल दो पल के जीवन में, क्यों गँवाए हम जान के। बल बुद्धि दिया भारत ने, फिर क्यों रहे हम डर-डर के।। आओ बजाय ताली दो हाथों से , प्रहरी जो बन बैठे हैं हमारे। अस्वच्छता के ब्यार मिटा के, आओ — स्वच्छता अभियान चलाए जम के।। »

जब ही जीवन है

कविता जल ही जीवन है मेघा रे मेघा रे जल बरसा दे । पतझर जीवन खुशहाल बना दे।। गर जल नहीं तो यह संसार नहीं। एक बार धरती पर अमृत बरसा दे।। चारो तरफ है प्यास ही प्यास । अपनी धारा से धरती की प्यास बुझा दे।। जल नहीं तो माटी में बल नहीं। जल बल से हमारी तकदीर बना दे।। बड़ी उम्मीद से सिंचा अपनी तकदीर को। हमारी मेहनत में नया रंग भर दे।। कहाँ गए वो रिमझिम के फुहार। अब की बरस खेतो में हरियाली भर दे।। »

आज फिर से

आज फिर से खिल जाने दो रात महकती हुई साँसों से भीगी तेरी हँसी की ख़नक उतर जाने दो एक बार फिर से रूह तक जैसे गूँज उठती हैं वादियाँ पर्वत से उतरती किसी अलबेली नदी की कल-कल से और तृप्त हो जाती है बरसों से प्यासी शुष्क धरा मन्नतों से मिली किसी धारा से मिलकर । »

छोटी सी मुलाक़ात

वह छोटी सी मुलाक़ात विचरती रहती है अक्सर स्मृतियों में मेरी । जब सिमट आए थे तुम मेरी पलकों के दायरे में, सकुचाते हुए, छोटे-छोटे कदमों से… मुस्कुराती हुई कोई बहार उतर आई हो किसी वीरान उपवन में जैसे । सुनो न ! एक बार फिर से भर दो मन की सूनी टहनियों में वही फूल तितलियों से एकाकी आकाश और फ़िज़ाओं में उन्हीं साँसों की महक । सदियों तक रहेगा इंतज़ार कभी फिर से आ जाना उसी उपवन की देहरी पर, सकुचाते ह... »

होली

चलो होली मनाते हैं सड़कों से पत्थर हटा कुछ गुलाल उड़ाते हैं चलो होली मनाते हैं। महरूम है बरसों से कोई बस्ती होली में वहां जाकर गुझिया पापड़ बांट आते हैं चलो होली मनाते हैं डर से बंद हो गई है खिड़कियां जिनकी प्रेम की थोड़ी बारिश से चलो उनको हंसाते हैं भूल कर सब कुछ चलो एक रंग में रंग जाते हैं चलो होली मनाते हैं चलो होली मनाते हैं । »

श्याम के रंग में राधा दीवानी

प्रीत की डोरी बांधें चली आई, तुझसे श्याम होली खेलन चली आई। बांसुरी तुम्हारी मुझको है प्यारी, दीवानी राधे गोपियां सारी। बांसुरी के स्वर लहरी में छुपा लो, कान्हा मुझे होठों से लगा लो। पिया के संग बांसुरी में है रहना, आज श्याम मोहे तुझे है रंगना। मुझ पर चढ़ा तेरी प्रीत का जादू, रंगों की नेह से मन बेकाबू। तू क्या नटखट हंसी उड़ाता? सबको तो उंगलियों पर नाचता। कौन सा जादू जादूगर सीखा, बरसाने तेरे रंग में... »

श्याम के रंग में राधा दीवानी

प्रीत की डोरी बांधें चली आई, तुलसी श्याम होली खेलन चली आई। बांसुरी तुम्हारी मुझको है प्यारी, दीवानी राधे गोपियां सारी। बांसुरी के स्वर लहरी में छुपा लो, गाना मुझे होठों से लगा लो। पिया के संग बांसुरी में है रहना, आज श्याम मोहे तुझे है रंगना। मुझ पर चढ़ा तेरी प्रीत का जादू, रंगों की नेह से मन बेकाबू। तू क्या नटखट हंसी उड़ाता, सबको तो उंगलियों पर नाचता। कौन सा जादू जादूगर सीखा, बरसाने तेरे रंग में भ... »

आई सुहानी होली

देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।। कण-कण में नया उल्लास है। आज धरती बनी रे खास है।। लाओ रंगों की भर-भर झोली। सब मिलकर हम खलेंगे होली।। देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।। नहीं काला रहे नहीं गोरा रहे। लाल पीले हरे छोरी छोरा रहे।। आज कोयल भी बनीं हंसोली। सब मस्ती में मस्त नव टोली।। देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।। न कोई राजा रहा न कोई रानी रही। सिर्फ खुशिया... »

जवानों की होली

जवानों ने खाई है, सीने पर अपने गोली ना भागे दिखाकर पीठ , प्राणों की लगा दी बोली आये दिन खेलते रहते, वो खून के रंग संग होली तब जाकर देश में बन पाती, रंगो वाली होली उनके लिए हर दिन ही, होली और दीवाली है खून बहे तब होली मनती, बंदूक चले तब दीवाली है बारुदों के ढ़ेर को समझे, वे तो अबीर गुलाले है तत्पर देश की रक्षा में, हरपल वो मतवाले है कारतूसों की जय माला पहन, विजय श्री वरने हुए खड़े शत्रु की पिचकारी ... »

Holi

आहट पाकर फागुन की, पेड़ों ने ओढ़नी बासंती ओढ़ी धमाल फाग संग चंग बजाने, निकली मस्तानों की टोली हल्की फुल्की ठंड के साथ, मौसम करे आंख मिचौली धूम मचाओ, रंग उड़ाओ, क्यों कि आ गया है होली बच्चे निकले घरों से ले, हाथों में अबीर गुलाले लगी महिलाएं गोबर संग, बड़कुल्ले ढाल बनाने मिठाइयों की महफिल सजती, किसे छोडे होठों से लगा ले ऐसी है होली की मस्ती, सबको रंग में अपने मिला ले कोई खेले रंगो से, कोई खेले फूलो... »

होली

बजे ढोलक,बजे नगमे मचे हुड़दंग होली में रंगी धरती, रंगा अंबर उड़े है रंग होली में । कोई गुब्बारे से खेले तो कोई मारे पिचकारी पड़ी है पान की छीटें चढ़े हैं भंग होली में। घुला है बाल्टी में रंग और तैयार पिचकारी आपकी राह देखे है सांवरे राधा तुम्हारी आपके आते ही हम आपको यूँ रंग डालेंगे भूल जाओगे तुम राधा याद आएंगे गिरधारी । आपको रंग डालेंगे हाथ में रंग है पीला पहले सूखा लगाएंगे भर के पिचकारी में गीला आ... »

Holi

HOLI rango ki fuhar hai ya aapas ka yeh pyar hai holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hai rang birange chere sab ke par chadta na koi rang kar door gile shikwe rahe sab ek dooje ke sang durriyan mitata paas bulata saal ka yeh tyohar hai holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hai bikhri khushiyan ghar aangan main jo rang chale holi ka jeeja sali ka khel yeh saath jaise daman choli ka masti ... »

हुड़दंग करेगे होली में

फिर आज गुलालों के खातिर बदरंग बनेगे होली में । अंग अंग पर रंग सजा हुड़दंग करेगे होली में ।। न जानेगे कितने रंग नये चेहरों पर खिल जायेगे । न जाने कितने टूटेंगे कितने दिल जुड़ जायेगे कितनो को तो तन्हा आकर तंग करेगे होली में अंग अंग पर रंग सजा हुड़दंग करेगे होली मे।।2 कुछ नये मुबारक आयेगे चाहत मे रंग लाने को कुछ दूर बहुत हो जायेगे यादो में तड़पाने को भींग किसी की बारिस में कुछ दंग करेगे होली में अंग अंग ... »

सावन

फुलवारी संग महकता सावन बाबगीयो मे खिलता सावन फल की मिठास जैसा सावन पवन संग उभरता सावन पतझड का है मौसम सावन चिडीयो का है मौसम सावन कोयल की गुंज सा मंधूर सावन कभी हषॆ से विभोरता सावन कभी ददॆ से सिकुडता सावन धरती को सहलाता सावन धरती पर छाता सावन हरीयाली,इठलाता,डोलता सावन धरती पर नया बदलाव लाता सावन »

सुनते आए हैं…..

सुनते आए हैं – अपनों का पर्व है होली मेरे आंगन जली होलिका मैं ही पंडित, मैं ही पूजा मैं ही कुंकुम, अक्षत औ” रॊली; सूनी गलियां, सूने गलियारे, सूने हैं आंगन सारे कौन संग मैं खेलूं होली! सुनते आए हैं – रंगों का पर्व है होली सुबह गुलाबी नहीं रही, अब सांझ नहीं सिंदूरी, धरती से रूठी हरियाली बेरंगा है अंबर भी; रंगों की थाल सजी, पर कौन रंग से खेलूं होली! सुनते आए हैं – खुशियों का पर्व है... »