काव्य प्रतियोगिता

26 जनवरी पर ( गरम दल की शायरी )

शोर बहुत है बाहर.. कि अंदर चुप ; अब रहा नहीं जाता ! क्या कहूँ उन बहरों से इस दिल की बात.. बिना धमाके के जिनको कुछ समझ नहीं आता !! :- प्रेमराज आचार्य »

आ रहा मंक्रर संक्राति का त्योहार

आ रहा मंक्रर संक्राति का त्योहार। तिल को गुड़ से मिलायेगें, दही को छक कर खायेगें। नही होगा किसी से शिकवा-शिकायत, दिल को पतंग सा आसमान में उड़ायेगें। सूर्य नरायण का दर्शन रोज होगा, भक्त मंडली का किर्तन रोज होगा। जल से न रहेगा किसी को प्रतिकर्षण, प्रात: स्नान अर्पण रोज होगा। मनायेगा इसे पूरा देश अलग-अलग नाम से, कोई कहेंगा संक्राति कोई पोंगल बतायेगा। कोई खिचरी तो कोई माघी बताकर, खुशी का गीत अपनों संग ग... »

मकर संक्रांति

यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है। भिन्न बोली-भाषाएं, खान-पान, भिन्न परिवेश है। आओ मैं भारत दर्शन कराता हूं। महत्त्व मकर संक्रांति की बताता हूं। सूर्य का मकर राशि में गमन, कहलाता है उत्तरायण। मनाते हम सभी इस दिन, मकर संक्रांति का पर्व पावन। दक्षिणायन से उत्तरायण में सूर्य का प्रवेश है। यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है।। गुजरात, उत्तराखंड में उत्तरायण कहते। इस दिन पतंग प्... »

मन की पतंग

मन की पतंग को भी ऐसे उड़ने दे! की ना कोई उसे बंद, न कोई उसे उड़ा सके! मदमस्त, मनमौजी हवा के जैसे चाहे जहां उड़ान भर सके! ख़ुशी मिले उसे जहां वहीं वह अपना डेरा डाल सके! मन की पतंग को भी ऐसे उड़ने दे! »

मकर संक्रांति : आसमान का मौसम बदला

आसमान का मौसम बदला बिखर गई चहुँओर पतंग। इंद्रधनुष जैसी सतरंगी नील गगन की मोर पतंग। मुक्त भाव से उड़ती ऊपर लगती है चितचोर पतंग। बाग तोड़कर, नील गगन में करती है घुड़दौड़ पतंग। पटियल, मंगियल और तिरंगा चप, लट्‍ठा, त्रिकोण पतंग। दुबली-पतली सी काया पर लेती सबसे होड़ पतंग। कटी डोर, उड़ चली गगन में बंधन सारे तोड़ पतंग। लहराती-बलखाती जाती कहाँ न जाने छोर पतंग। »

Maker Sankranti

त्यौहारों का देश हमारा, पर्व अनेक हम मनाते है हर उत्सव में संदेश अनेक है, विश्व को हम बतलाते हैं अब पौष मास में निकल धनु से, मकर में सूरज आया है और संग अपने लौहरी एवम् मकर सक्रांति लाया है सक्रांति आते ही हर छत पर, रौनक छाने लगती है हर बच्चे को सुबह सुबह, याद छत कि आने लगती है रंग बिरंगी डोर पतंग से, आसमां को सजाते है और अपने अरमानों को, पंख भी संग लगाते है हर बुजुर्ग इसी दिन बचपन, को फिर से जी सक... »

सकरात की रंग

आज मैं खुश हूं सभी बुराई पोंगल पर्व में झोंक जलधर फाटक आज ना बंद कर पतंग ना मेरी रोक सजि पतंग वैकुंठे चली थी अप्सरा संग करे होड़ रंभा मेनका झांक के देखे किसके हाथ में डोर बारहअप्सरा सोच में पड़ गई कैसी यह रितु मतवाली कल्पवृक्ष से धरा द्रम तक सबकी पीली डाली सब वृक्षों की डाल से उलझे पवन के खुल रहे केश केशु रंग फैलाते फिर रहे कहां है कला नरेश नदी नहान को तांता लग रहा मिट रहे सबके रोग मूंगफली ,खिचड़ी... »

सकरात के रंग

आज मैं खुश हूं सभी बुराई पोंगल पर्व में झोंक जलधर फाटक आज ना बंद कर पतंग ना मेरी रोक सजि पतंग वैकुंठ चली थी अप्सरा संघ करे होड़ रंभा मेनका झांक के देखे किसके हाथ में डोर बारह अप्सरा सोच में पड़ गई कैसी रितु मतवाली कल्पवृक्ष से धरा द्रम तक सबकी की पीली डाली नदी नहान को ताता लग रहा मिट रहे सबके रोग मूंगफली ,खिचड़ी ,तिल कुटी का देव भी कर रहे भोग »

मकर संक्रान्ति

मकर संक्रान्ति

जैसे जैसे मकर संक्रान्ति के दिन करीब आते हैं हर जगह पतंग! हर जगह पतंग! ये कागज की पतंगें बहुत आनंद देती हैं नीले आसमान पर, एकमात्र खिलौना सबको मंत्रमुग्ध कर देते हैं हम सभी आनंद लेते हैं जैसे जैसे मकर संक्रान्ति के दिन करीब आते हैं “ढेल दियो मियाँ! लच्छी मारो जी !!! लपटो !! लपटो !! “अफआआआआआआआआ !! अफआआआआआआआआ !!” छतों पर उत्सव का माहोल होता है बस सूरज और आकाश, और उत्साह भरे स्वर और पतंग!... »

ट्वेंटी ट्वेंटी

दिल से स्वागत करो सभी साल ट्वेंटी ट्वेंटी का। बीत गए वो दिन बन्धुओं किसी के फोर ट्वेंटी का।। »

Page 1 of 13123»