काव्य प्रतियोगिता

आजादी

सुभाष,भगत,आजाद ने, दे दी हमे आजादी ! वीरो के कुर्बानी रंग लायी, वन कर देश की आजादी !! अंत हुआ अत्याचारो के अत्याचार, टूटा गरूर गद्दारो के ! धरती भी झूम उठी वर्षो बाद, उन्हें मिली जो आजादी !! धूम मचाया रंग जमाया, गद्दारो को खूब नाच नचाया ! लाखों जुल्म सह के भी, त्यागे न हम अपनी आजादी !! गद्दारो को क्या खबर थी, कब टूट पड़ेगे हम उन पर ! हम सब के नस-नस में, लहू बन गयी थी आजादी !! लहू को हमने समझ कर पा... »

मैं मर्द कहाया फिरता हूँ

मैं मर्द कहाया फिरता हूँ, मैं मर्द कहाया फिरता हूँ चलता हूँ उल्टे राहों पर, लोगों को राह दिखाता हूं गड्ढों में गड्ढा खोदकर, मैं खुद को खूब बचाता हूं बच पाया फिर भी कभी नहीं, मैं बन बेसहारा गिरता हूं मैं मर्द कहाया फिरता हूँ…. मैं मर्द कहाया फिरता हूँ कर जाता हूँ जब पाप कभी, औरों का दोष दिखाता हूं सीख पाया कभी ना मर्यादा, दुर्जन को बहुत सिखाता हूं स्वार्थ स्वयं का साध सदा, सर्वज्ञ स्वयं को सम... »

Meri monjil

Meri monjil yah hai ki,ma ki bedona ko dur kar saku to pita ke kasto ko bhi. Meri monjil yah hai ki, anatho ke liye apno jesa bon saku to garibo ke liye sahara. Meri monjil yah hai ki, mujhse kisi ko dukh na pohuse bolki sabhi ke mon me khusi owr muh me hasi la saku. Meri monjil yah hai ki, mohilao ko apman nehi bolki somman de saku. Meri monjil yah hai ki, garibo ke rakshos ko nas karne ke liye m... »

गुरु

ना था रस्ते का पता ना थी मंज़िल की चाहत थके ज़िन्दगी से गुरु के चरणों में मिली राहत माता पिता ने चलना सिखाया मिला ना मंज़िल का कोई अता गुरु के चरणों में शीश झुकाकर मिला सही गलत का पता गुरु का रखो मान उनका ना करो अपमान गुरु के ज्ञान को धारण कर अर्जुन बन गया धनुर्धारी महान गुरु के ज्ञान को स्वीकार करो इस ज्ञान से अपना उद्धार करो हर क्षण इनका गुण गाकर इनके चरणों को प्रणाम करो गुरु के ज्ञान से सब ठीक हो ... »

क्यों

सावन मे सखी मन 💕 क्यों बहके । सारे पपीहा पेड़ पर क्यों चहके।। काली घटा प्रेम रुत क्यों ले आई। उसके आने से मन 💕 क्यों धड़के ।। सावन के 💧 बूंद गालो को क्यों चूमे। इस मौसम में अंग अंग क्यों फड़के।। »

दोस्ती

कभी बुलाये प्यार से कभी बुलाये मजाक से ज़िन्दगी की हर घडी ये साथ देती है दोस्ती होती ही ऐसी है दिल होवे गम में तो ये बात करे नरम में छोटी ख़ुशी में भी पार्टी मांगे जमके मूड चाहे जैसा हो ये मज़ाक करती है दोस्ती होती ही ऐसी है किसी से हुई मारपीट हो किसी ने कर दिया चीट हो ये उसको भी पछाड़ देती है दोस्ती होती ही ऐसी है ये ना बुलाये कभी नाम से दूसरा उड़ाए मजाक तो गया वो काम से हर बात में ये पास होती है दोस्... »

अन्नदाता की व्यथा

टुकड़े-टुकड़े हुई मेदिनी , कैसी ये लाचारी है । ऐसे उजड़े खेत कि जैसे , कोई विधवा नारी है । शीश पकड़ बैठा किसान है , प्रश्न हजारों साल रहे । कैसे अन्न उगाऊँ मैं यदि , सूखे जैसे हाल रहे । बिन बरसे ही मेघ सिधारे , प्यासी धरा हमारी है ।। ऐसे उजड़े खेत कि जैसे , कोई विधवा नारी है । कर्जदार था पहले से ही , धरती माता रूठ गई । कैसे मैं परिवार चलाऊँ , आस अन्न की टूट गई । व्यथा वंश की शूल चुभाए , भार हृदय प... »

श्री राम

कथा सुनाऊ पुरुषोत्तम श्री राम की विष्णु रूपी अयोध्या पति नाथ की त्रेता युग में जनम हुआ राजा दशरथ के महल में अयोध्या हुआ पूरा चहल पहल में सुमित्रा से जनम हुआ लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जनम हुआ कैकेयी पुत्र भरत का खुशियों की लहर उठी आये भाई श्री राम के ग्रंथो का ज्ञान मिला गुरु वशिस्ठ की कृपा से शास्त्रों का ज्ञान मिला गुरु विश्वामित्र की दया से आयी घडी खुशियों की सबका जीवन सफल है हो गया राम का सीता से ... »

अन्नदाता की व्यथा

“अन्नदाता की व्यथा ” टुकड़े-टुकड़े हुई मेदिनी , कैसी ये लाचारी है । ऐसे उजड़े खेत कि जैसे , कोई विधवा नारी है । शीश पकड़ बैठा किसान है , प्रश्न हजारों साल रहे । कैसे अन्न उगाऊँ मैं यदि , सूखे जैसे हाल रहे । बिन बरसे ही मेघ सिधारे , प्यासी धरा हमारी है ।। ऐसे उजड़े खेत कि जैसे , कोई विधवा नारी है । कर्जदार था पहले से ही , धरती माता रूठ गई । कैसे मैं परिवार चलाऊँ , आस अन्न की टूट गई । व्... »

कोरोना

चंद लम्हो की ज़िन्दगी में अब और क्या- क्या होना है ब्रष्टाचार क्या कम था जो आगया कोरोना है गरीब खा रहे मांगके और अमीरो के पास सोना है मिडिल क्लास की किस्मत में तो रोना ही रोना है इस परेशानी में पूरा जाहां है रो दिया कितनो ने अपने परिवार को है खो दिया सारे देशो में ये लॉकडाउन है शुरू हो गए जो जहा थे वो वही है रुक गए घर जाते वक़्त कुछ रस्ते में ही मर गए और घरवाले है की घर में बैठे बैठे थक गए फिर भी इर... »

भुआ

बैठे थे गुमसुम से एक टक निहार के दादी आयी बोली फिर भुआ आ रही है ससुराल से ये सुनके खुश हुए की भुआ हमारी आएगी उनके आने से इस घर की रौनक बढ़ जाएगी अपने साथ वो मेरे भाइयो को भी लाएगी हम सबको वो खेल खिलाएगी मेरे लिए वो स्पेशल ड्रेस भी लाएगी भुआ भतीजे का तो रिश्ता ही न्यारा है एक रिश्ते में ये कई रिश्ते निभाती है प्रेम बरसाने में तो वो माँ बन जाती है बड़ी बहन की तरह हर मुश्किल में मदत कर जाती है तारीफ मे... »

दादी माँ

आंगन में बैठी एक टक निहार लेती है चलती धीरे पर काम तेजी से कर लेती है पढ़ना कम आता है पर दुनिया का पाठ पढ़ा देती है डॉक्टर नहीं पर हर दर्द ठीक कर देती है दादी माँ की बात ही निराली है तुम्हे मिले सबसे ज्यादा इसलिए बादमे वो खाती है तुम सो चैन से इसलिए बादमे वो सोती है दिखा ख़ुशी का चेहरा अपने दुःख में अंदर ही अंदर रोती है साक्षात् भगवन भी इनसे मार्ग दर्शन लेता है सफल वो ही ज़िन्दगी में जो इनसे आशीर्वाद ... »

उठ भी जा ना

चल अब उठ भी जा ना अभी कुछ काम नहीं फिर भी क्यों तू थकता है मुश्किलों को देख के इतना क्यों डरता है सिख कुछ सूरज , चाँद से खुद वक़्त पे है आते पुरे जहान में वक़्त पे रौशनी है फैलाते अगर ये नहीं उठते वक़्त पे तो कहा तू उठा करता ना कही देख पाता सिर्फ सो जाया करता चल अब उठ भी जा ना सिख किसान , डॉक्टर , सैनिक से कुछ कितनी मेहनत करता है सब काम के बाद भी समय पे ये उठता है मेहनत करने वाला ही चैन की नींद सोता ... »

दिल तुम्हारी और

आज भी वो दिल तुम्हारी और जाता है जो तुमने तोड़ दिया था आज भी तुम्हारे गुण गाता है जिसका मुँह चुप कर दिया था आज भी तुम्हारी गलियों में रहता है जिसको कही और छोड़ दिया था ये दिल सब जनता है पर कहा मानता है ये आज भी तुम्हारी आवाज सुनना चाहता है जिस से तुम बोलती नहीं खूब समझाया पर माना नहीं वो किसी की दिल लगी को सजा समझने लगे , दो पल रूत के गुज़ारे , तो जफ़ा समझने लगे अपने दिल से बोला आ तुझे जोड़ देता हु ज़िन... »

कोरोना चालीसा

कोरोना कोरोना कहते हो कोरोना से क्यों डरते हो। शाम सवेरे जब देखो कोरोना चालीसा भजते हो।। कोरोना के डर से तुम कोरोना की उपासना करते हो। सोते जागते उठते बैठते कोरोना चालीसा भजते हो।। कहे कवि डट के मुकाबला करना तुम कहाँ सिखते हो। भूखा प्यासा चौक चौराहे पे कोरोना चालीसा भजते हो।। »

दिल

दिल में जगह की कमी नहीं होती यह तो खुला आसमान है खूब पंख फैलाओ यहाँ बाटने वाली जमीन नहीं होती »

हम सब

आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये हम सब एक हो जाये ये जात पात सब मिट जाये आओ सब अपने दुःख सुख में एक हो जाये आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये हमारे सपनो में भी पंख लग जाये खुद खुश रहे और दुनिया में ख़ुशी फैलाये हम ज़िन्दगी में खूब उचे उड़े पर धरती को ना भूल जाये इस दुनिया के समुन्दर में तेर हम सफलता के मोती ले आये कभी डॉक्टर बन जाये तो कभी सैनिक बन जाये अपने देश के लिए कुछ कर जाये हम सब एक हो जाये... »

……किसी से कम है?

मेरे देश की मिट्टी किसी सोने से कम नहीं। खेतो में लगी फसल किसी हीरे मोती से कम नहीं।। यही धरती की गोद में खेले पले हुए हम जवां। हिमालय से निकली गंगा किसी अमृत धारा से कम नहीं।। हमारे देश पे बुरी नजर रखने वाले जरा सुन तो ले। शहीदों के लहू से रंगी यह धरती किसी चंदन से कम नहीं।। »

नये जमाने की नयी बेटियाँ

कामयाबी के डगर पे चल पड़ी है, नये जमाने की नयी बेटियाँ। बेटी से नफरत करने वाले जालीम समाज, देख आसमां में छा गयी आज की नयी बेटियाँ।। वो जमाना गया जब हम जुल्म के शिकार थे, अब ईंट के जवाब पत्थर से दे सकती है बेटियाँ। हम से है जमाना जमाने से हम नहीं, यही एलान करती है आज की नयी बेटियाँ।। बेटी को जन्म से पहले ही माड़ने वाले, जरा सोच तेरी माँ भी किसी की रही होगी बेटियाँ । क्या होता जब माड़ देती तुझे वह अ... »

mere dil

मेरे दिल से आज एक आवाज आयी बोलै बहार मत जाना मेरे भाई वरना पुलिस करेगी पिटाई पुलिस और डॉक्टर कर रहे है कोरोना से लड़ाई कोरोना के चाकर में कुछ की रुक गयी है शादी और सगाई सबकी रुक गयी है कमाई सबको मिलकर हटानी है इस देश से कोरोना की परछाई सरकार की मनो बात जो उन्होंने है बताई आओ घर में रहकर जीते इस कोरोना की लड़ाई मेरे दिल से आज एक आवाज आयी हिमांशु के कलम की जुबानी »

अब पछताए होत क्या (कोरोना)

कोरोना से न करना यारी। यह है जान लेवा बिमारी।। कितने को डसा ए काला नाग। आज पर गया हम सब पे भारी।। क्यों सो चूके थे हम और तुम। चुपके से कोरोना का वार था करारी।। अच्छा होता काश!! हम संभल जाते। शायद ही देखने को मिलता ए महामारी।। »

मेरे पास

धीरे से मेरे पास आ जाता है कोई मेरे दिल को लुभा जाता है कोई मेरे कान में मीठे स्वर बोल परछाई बन जाता है कोई मेरा मन ज़रा बेचैन है उसको ज़रा सा भी नहीं चैन है दर्शन दे मन शांत कर जाता है कोई धीरे से मेरे पास आ जाता है कोई हिमांशु के कलम की जुबानी »

♥️♥️वो माँ होती है ♥️♥️

♥️♥️mother’s day special♥️♥️ जो नज़रो से परख ले वो माँ होती है । दर्द को दिल में जो रख ले वो माँ होती है । कर कोई काम तू बुरा खुदा से चाहे हो छुपा जो तेरा चेहरा भांप ले वो माँ होती है । जो तुझको जन्म दे तेरे मुख को चूम ले हो तू कष्ट में तो रोती है वो माँ होती है । जो कष्ट तेरे छीन ले चुभते काँटे बीन ले तुझपे प्यार वार दे वो मां होती है । जब कभी तू उदास हो भले कोई ना पास हो जो सदैव साथ दे वो म... »

Maa

🌹*मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं*🌹 💕 माँ- दुःख में सुख का एहसास है, माँ – हरपल मेरे आस पास है। माँ- घर की आत्मा है, माँ- साक्षात् परमात्मा है। माँ- आरती, अज़ान है, माँ- गीता और कुरआन है। माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है, माँ- उस रब का ही एक रूप है। माँ- तपती धूप में साया है, माँ- आदि शक्ति महामाया है। माँ- जीवन में प्रकाश है, माँ- निराशा में आस है। माँ- महीनों में सावन है, माँ- गंगा सी पावन है।... »

माँ

Happy mothers day हर सफलता के पीछे माँ का सहारा है दोस्तों डूबती नैया पार लगदे वो किनारा है दोस्तों माँ के आशीर्वाद से जीवन सफल हो जायगा माँ के प्यार से सब ठीक हो जायगा सेवा करो माँ की जीवन का हर शून्य ख़तम हो जायगा अपमान मत करो माँ का वर्ण हर पुण्य ख़तम हो जायगा माँ शब्द बोलने से चारो धाम हो जायगा हर व्यक्ति बस यही गुण गाएगा दोस्तों हर सफलता के पीछे माँ का सहारा है दोस्तों written by – himans... »

मां तू मां है

“माँ तू माँ है” योगेश ध्रुव”भीम” ************************ माँ तू जननी है, तूने मुझे, कोख में, पाला, नौ माह तक, जन्म दी, इस वसुंधरा का, दर्शन कराई, जननी हो न, खुद दुख सहकर, सुख का भोग कराई, हाँ माँ, नदियों के नीर की, निर्मलता की धार हो, शीतल चन्दन हो तुम, तू ही तो हो, मुझे चलना सिखाई मेरे हर पगो का सहारा बनी, मुझे बातें करना सिखाई, हाँ माँ, मुझे सिखाई बाते करना, मैं आपके बाग... »

मां तू मां है

माँ तू माँ है” »

इम्तिहा

“इम्तिहा” योगेश ध्रुव “भीम” “जिंदगी की डोर खिंचते चल पड़े हम, मंजिल की तलाश पैरो पर छाले पड़े” “बिलखते हुए सवाल लिए पापी पेट का, दर-दर भटकते लेकिन हल ढूढ़ते ढूढ़ते” “चिराग जलाते हुए जीने की तमन्ना लिए, दर्द बयाँ करू कैसे चिराग तु बुझाते चले” “डगर भी कठिन इम्तिहा की मौन है हम, मेरे परवर दिगार रहम नाचीज पे तू कर” »

kuch baat to hai tum me

Kuch baat to hai tum me jo mujhe tumhari or le jaati hai Tumhari rooh ko meri rooh se har waqt milati hai Yaad me tumhari kabhi hasati hai to kabhi rulati hai Badi kambhaqt hai tumhari yaad sapne me bhi aa jaati hai Jaha jau waha tumhari parchai dikh jati hai Tumhare naino ki sundarta is dil me samati hai Tumhari katilana muskan pe jaan si atak jaati hai Kuch to baat hai tum me jo mujhe tumhari or... »

आवारा सावन

सावन के एक एक बूंद जो गिरा मेरे होंठो पे। कैसे बयां करू अपनी दास्तां इन सुर्ख होंठो से।। उन्हें क्या पता कब चढी सोलहवां सावन मुझ पे। आ कर एक मर्तबा देख तो ले क्या गुजरा है इस दिल पे।। बहकने लगे है मेरे कदम यही बेईमान फीजाओ में। उलझन में फंस गए हम इसी बरस के सावन मे।। »

किसान

बिन पानी बनी है भूमि बंजर , नहीँ कर पाया है किसान खेती इसमेँ , नहीँ बो पाया है बीज वो इसमेँ , मिली है अमानत मेँ उसे भूमि बंजर , हो रही है तकलीफ उसे , नहीँ कर पाया है वो फसल उसमेँ , बढ गया है कर्ज उस पे , अब नहीँ है कोई उपाय उस पे , तो कर रहा आत्महत्या पेड पे । »

नारी

“नारी” प्रकृति सा कोमल तुम, मेरु समान दृढ़ता लिए, नीर सा निर्मल हो तुम, नारी तुम न हारी हो || अन्धकार की दीपक, निश्च्छलता की मूरत, सोये मन की आशा हो, नारी तुम न हारी हो || वसुंधरा की शोभा हो, वात्सल्य मयी ममता, धिरजता की मूरत धर, नारी तुम न हारी हो || अर्धनारेश्वर में तुम तो, नर नारी के रूप लिए, जननी तुम तो जननी, तुम बीन अधूरी सृष्टि, नारी तुम न हारी हो || योगेश ध्रुव”भीम” »

Haal Bataeye

Samundar kehta hai nadi se zara mujhme mil jayeye Aaram se bathiye zara apna haal to bataeye Wo bole haal to bata denge zara ek cup chai to layeye Sirf chai se baat nhi banegi zara nashta bhi to khaeye Mata ji ki tabiyat kaisi haii ye bataeye Apne sath unko bhi humare leke ayeye wo sab to thik hai apna haal to bataeye »

suneye meri kavita

Shayri – Kiske khwaabo me raat bhar jag rahe ho Kya baat hai aaj bade khush lag rahe ho POEM Suneye zara meri kavita shuru me karta hu Garmi ka waqt hai thodi thandi baat me karta hu In dino sabki sundar kavitaye me padhta hu Kavita likhna ap sabse hi to me sikhta hu Fir jake apni kavita apke samne rakhta hu Desh ka naujavan hu Tirangee se pyar karta hu Ap sabhi ki tarah me bhi uspe marta hu... »

Desh Sankat

Desh Sankat Ye desh me kaisa sankat hai aa gaya Kuch ko kar raha bimar or kuch ko maut ki nind sula gaya Ye sadko pe kaisa sanata hai chaa gaya Ye desh me kaisa sankat hai aa gaya Ab aya hai to use hume harana hai Markar nhi hath jodkar usse bhagana hai Bahar bulaye kitna par ghar par rehke use harana hai Khud to khush rehna or dusro ko khush karna hai Bure waqt me ekta banaye rakhna hai Desh ke v... »

मां

लिये छः ऋतुयें आये नया साल, हर ऋतु गुजरे मेरी संग मां के, त्यौहार मेरे न तुमसे, संग मां के, मेहनत मेरी ,उगले सोना मेरी माँ, समझता मैं खिलखिलाना मां का, सिसकता मैं देख सुखी धरा को, सुनी सुखी आंखे मेरी देखे अंबर, सुख गया वो भी जैसे भूख मेरी, जा रहा मैं अब उसके द्वारे, लिये जा रहा अपने शिकवे, सौप दिये जा रहा मां अपनी, विलाप मेरा भरेगा अंबर, बन बूंदे टपकेंगे मेरे आँसू, मेहनत से थाम लेना मेरी माँ, जा र... »

बसंत ऋतु

बसंत ऋतु में जब बहा बसंती ब्यार। गिरने लगी आसमान से सावन के फुहार।। कहीं दूरऽ से जब कोयलिया मधुर गीत सुनाए । दिल के बगिया में सैंकड़ों कलियां खिल जाए।। ए रिमझिम के नजारा लगता है कितना न्यारा। दिल में एहसास जगाए मीठा मीठा प्यारा प्यारा।। पतझर जीवन में साल भर पे आया बसंत बहार। यही मौसम में होता है किसी से किसी को प्यार।। कहे कवि — काश ऽऽ यह बसंत ऋतु न आता। सोंचो – सुखी डाली पे मेंहदी के ... »

,,,,,, क्या कम है ?

,,,,,,क्या कम है (कविता) Independence day कौन कहता है हमारे वतन में, प्रेम की गंगा नहीं बहती है। हिमालय से गंगा, यमुना, और सरस्वती के मिलन ए क्या कम है? यही वो देश है जो कभी, सैकड़ों सपूतो ने लिया था जन्म। देश पर हो गये थे सभी कुर्बान,उनकी कुर्बानी की दास्तां अन्य दास्तां से कम है? हमारा आन तिरंगा बान तिरंगा शान तिरंगा , तीन रंगो में लिपटी हमारी धरती माता, यही रंग भारत को भाता ,कितना मनोहर कितना प... »

बीती रात, टूटी आश

आश लगाई , दूर मेघालय में कर्जा लाया, बीज लगाया खेतो खलियानो में……… बीता सावन ,भादो आया न आया बादल, खेतो खलियानो में…….. बीती रात, टूटी आश, बैठा किसान, खेतो खलियानो में……. कुऐ सुखे, धरती प्यासी, न आया पानी ,नल कूपों में…… चेहरा मुरझाया, पानीआया ,ऑखो में……. उदर दहक उठा, धुऑ ना उठा चूल्हो में…… कोहराम मचा घरानो में…. ... »

चितचोर सावन

ए साजन आम के बाग में, झूला लगा दे। अब की बरस सावन के मधुर गीत सुना दे। रिमझिम बारिश में भीगे है मेरा तन बदन मोरनी की भाँति मै बलखाउँ ऐसा एक धून बजा दे। चारो तरफ के रुत है प्रेम – ए- इकरार के सतरंगी रंग मन को लूभाए इन्ही रंगो से मुझे सजा दे। जब से सावन आए आए दिन बहार के प्रेम रस की मै प्यासी बस एक घूँट पिला दे। नींद चुराए चितचोर सावन के महीना इन झूलो की कतारो में मेरा भी झूला लगा दे। »

सावन के फुहार

पतझर के मौसम उस पे बसंत बहार आसमान से बरसे सावन के फुहार। कहीं मन जले कहीं ख्वाबो के आशियाना जले यही मौसम में होता है अपनो से अपनो का प्यार।। बिन पायल के पग में घूंघरू बजे कोयल की बोली साजन के याद दिलाये बड़ा दर्द जगाता है सावन के फुहार। »

ऐसा भारत बनाए

कविता ऐसा एक भारत बनाए नैतिकता क अभाव में, हमने जो स्वच्छता को अपनो से अलग किया। तरह तरह के बीमारियों को गले लगा कर, अपना अनमोल जीवन नष्ट किया।। आओ हिन्द देश के निवासी, स्वच्छता के एक नया संसार बनाए। चारो दिशाओं में हो हरियाली ही हरियाली ऐसा एक भारत बनाए।। »

ऐसा भारत बनाए

कविता ऐसा एक भारत बनाए नैतिकता क अभाव में, हमने जो स्वच्छता को अपनो से अलग किया। तरह तरह के बीमारियों को गले लगा कर, अपना अनमोल जीवन नष्ट किया।। आओ हिन्द देश के निवासी, स्वच्छता के एक नया संसार बनाए। चारो दिशाओं में हो हरियाली ही हरियाली ऐसा एक भारत बनाए।। »

कोरोना से डरा ना

कविता कोरोना से डरो ना स्वच्छता को अपनाओ, कोरोना को ठेंगा दिखाओ। जहाँ से आया हमारे देश में, उसे वहाँ भगाओ।। चारो तरफ मचा दिया कोहराम, परेशान हो गए हैं हम। महाकाल न रहे हमारे बीच, ऐसा एक माहौल बनाए।। समस्त नियम के पालन कर के, हम उस पर हावी हो जाए। मिटा सके न हम सब को, ऐसा एक पर्यावरण बनाओ।। बहुत सह लिए दर्द, अब दर्द हम से सहा नहीं जाता। स्वच्छता के हथियार बना कर, कोरोना पर तोप चलाओ।। कहे “प्र... »

स्वच्छता

स्वच्छता के डगर पे, देशवासीयो दिखाओ चल के। करोना भागेगा डर से, तुम और हम ही योद्धा है आज के।। पल दो पल के जीवन में, क्यों गँवाए हम जान के। बल बुद्धि दिया भारत ने, फिर क्यों रहे हम डर-डर के।। आओ बजाय ताली दो हाथों से , प्रहरी जो बन बैठे हैं हमारे। अस्वच्छता के ब्यार मिटा के, आओ — स्वच्छता अभियान चलाए जम के।। »

जब ही जीवन है

कविता जल ही जीवन है मेघा रे मेघा रे जल बरसा दे । पतझर जीवन खुशहाल बना दे।। गर जल नहीं तो यह संसार नहीं। एक बार धरती पर अमृत बरसा दे।। चारो तरफ है प्यास ही प्यास । अपनी धारा से धरती की प्यास बुझा दे।। जल नहीं तो माटी में बल नहीं। जल बल से हमारी तकदीर बना दे।। बड़ी उम्मीद से सिंचा अपनी तकदीर को। हमारी मेहनत में नया रंग भर दे।। कहाँ गए वो रिमझिम के फुहार। अब की बरस खेतो में हरियाली भर दे।। »

आज फिर से

आज फिर से खिल जाने दो रात महकती हुई साँसों से भीगी तेरी हँसी की ख़नक उतर जाने दो एक बार फिर से रूह तक जैसे गूँज उठती हैं वादियाँ पर्वत से उतरती किसी अलबेली नदी की कल-कल से और तृप्त हो जाती है बरसों से प्यासी शुष्क धरा मन्नतों से मिली किसी धारा से मिलकर । »

छोटी सी मुलाक़ात

वह छोटी सी मुलाक़ात विचरती रहती है अक्सर स्मृतियों में मेरी । जब सिमट आए थे तुम मेरी पलकों के दायरे में, सकुचाते हुए, छोटे-छोटे कदमों से… मुस्कुराती हुई कोई बहार उतर आई हो किसी वीरान उपवन में जैसे । सुनो न ! एक बार फिर से भर दो मन की सूनी टहनियों में वही फूल तितलियों से एकाकी आकाश और फ़िज़ाओं में उन्हीं साँसों की महक । सदियों तक रहेगा इंतज़ार कभी फिर से आ जाना उसी उपवन की देहरी पर, सकुचाते ह... »

होली

चलो होली मनाते हैं सड़कों से पत्थर हटा कुछ गुलाल उड़ाते हैं चलो होली मनाते हैं। महरूम है बरसों से कोई बस्ती होली में वहां जाकर गुझिया पापड़ बांट आते हैं चलो होली मनाते हैं डर से बंद हो गई है खिड़कियां जिनकी प्रेम की थोड़ी बारिश से चलो उनको हंसाते हैं भूल कर सब कुछ चलो एक रंग में रंग जाते हैं चलो होली मनाते हैं चलो होली मनाते हैं । »

श्याम के रंग में राधा दीवानी

प्रीत की डोरी बांधें चली आई, तुझसे श्याम होली खेलन चली आई। बांसुरी तुम्हारी मुझको है प्यारी, दीवानी राधे गोपियां सारी। बांसुरी के स्वर लहरी में छुपा लो, कान्हा मुझे होठों से लगा लो। पिया के संग बांसुरी में है रहना, आज श्याम मोहे तुझे है रंगना। मुझ पर चढ़ा तेरी प्रीत का जादू, रंगों की नेह से मन बेकाबू। तू क्या नटखट हंसी उड़ाता? सबको तो उंगलियों पर नाचता। कौन सा जादू जादूगर सीखा, बरसाने तेरे रंग में... »

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