काव्य प्रतियोगिता

टूटे अपने सपने

थी ख्वाईश हमारे दिल को मगर, इतफाकन गम करोना के मिल गए। जब होने लगे थे साकार अपने सपने, तब महामारी के आगोश में हम समा गए।। क्या करे घर में जवान बहन बेटी थी हमारी, बेरोजगारी के देश में रोजगार कहाँ मिलता। पापी पेट का सवाल लिए खड़े थे हमारे बच्चे, गर न जाता परदेश होंठों पे हंसी कैसे आता।। सोचा था अपने गुलशन में गुल खिलायेंगे, गुल न खिल कर किस्मत में काँटे ही मिले। गरीब की गठरी सिर पर ले कर ए दोस्त, दे... »

दिल हार गया

गये थे परदेश दो वक्त के रोटी कमाने। क्या पता था करोना आएगा दिल जलाने।। दिल में सपने ले के, चले थे हम परदेश । सपने सपने ही रह गए बदल गये हमारे भेष।। कभी एक गज की दूरी तो कभी दो गज की दूरी। कैसे कमाते हम यही थी हमारी मजबूरी।। किस्मत व करोना ने क्या क्या रंग दिखाए। मुंह (👄) में पट्टी बगल में करोना हाए हाए।। कहे कवि चलो वापस चले बहुत कमा लिए यार । जिंदगी है अनमोल यही कहता है घर परिवार।। »

टुटा दिल

आज मेरी हैसियत तुमने दिखा दी तुम्हारी नज़रो में मेरी कीमत तुमने दिखा दी कल तक तो पूछती थी खैरियत आज मेरी बुरी किस्मत तुमने दिखा दी मेरे साथ जीने मरने की कस्मे खाती थी मेरे साथ हर पल समय बिताती थी मैं कमजोर क्या हुआ मेरी औकात तुमने दिखा दी मैं भूल जाऊ ये मुमकिन है मेरा दिल तुम्हे भूल जाये ये नामुमकिन है मेरा दिल कितना कमजोर है आज ये हकीकत तुमने दिखा दी »

प्रवासी मजदूर

प्रवासी मजदूर मजदूर हूं, मजबूर हूं, कैसी है तड़प हमारी, या हम जाने, या रब जाने, आया कैसा चीनी कोरोना, ले गया सुख-चैन हमारा, जेब में फूटी कौड़ी नहीं, छूट गया काम- धाम हमारा, खाने को पड़ गए लाले, घर जाना अब है जरूरी हमारा, जाऊँ या न जाऊँ दोनों तरफ है मौत खड़ी, मंजिल है मिलोंं दूर फिर भी, घर जाना है जरूरी हमारा, कुछ पैदल ही चले गए, कुछ साइकिल से चले गए, कुछ रास्ते में ही दुनिया छोड़ गए, सामने है कोरोना... »

जान

मेरे दिल की आन हो तुम मेरे मन की शान हो तुम थोड़ी नादान हो पर मेरी जान हो तुम मुस्कुराओ तो फूल खिल जाये तुम्हारी ख़ुशी में मुझे सब मिल जाये इस अंजानी दुनिया में मेरी पहचान हो तुम तुम्हे बस देखता रहू वारि वारि तुझमे ही मेरी दुनिया सारी तुमसे ही महके ज़िन्दगी मेरी गुल-ए-गुलज़ार हो तुम – हिमांशु ओझा »

रिश्ते

सब रंगो का मेल होते है दुःख सुख में साथ होते है बुरे हो या अच्छे रिश्ते तो रिश्ते होते है रिश्तो के भी कई नाम होते है किसी की माता तो किसी के पिता किसी की जीवनसाथी तो किसी के दोस्त होते है रिश्ते तो रिश्ते होते है रिश्तो ने ही हमे जीना सिखाया उनके कारण ही हमने सब कुछ पाया उन्होंने ही हर रस्ते पे मदत की हमारे मंज़िल पहुंचने पर उन्होंने ही जशन बनाया रिश्ते निभाना ही हमारा पहला धर्म है यही पहला और यही... »

श्रद्धांजलि

चरखे से अगर आजादी मिलता, हमे सेना की जरूरत न होता l चरखे से हिंदुस्तान चलता, हिन्द मे कोई विशेष ना होता l न हिंदू मुसलमान होता, सभी हिंदुस्तानी पूत कहलाता l न करगिल, न चीन से युद्ध होता, सही मायने मे भाई – भाई कहलाता l विश्व क्रम में पहला स्थान होता, चारो तरफ नमो नमो होता l वीरों की शहादत न होता, न जालियावाला कांड होता l चरखे ने साजिस रचा, हिन्द को बेवकूफ़ बनायाl पर अब ना चल पाएगा, निस्वार्थ... »

सपना

तेरे नैनो में यु समाता हूँ बंद आंखे तो क्या खुली आँखों में भी दिख जाता हूँ तेरी अनहोनी को होनी कर मैं सपना कहलाता हूँ प्रगति का प्रथम चरन तेरा मैं ही बढ़ाता हूँ तेरे मन का आईना हूँ तेरी हकीकत दिखाता हूँ कभी पूरी नींद दिलाता हूँ तो कभी बीच नींद में ही जगाता हूँ तुम्हारा नजरिया हूँ अच्छा तो कभी बुरा कहलाता हूँ आमिर गरीब में समानता दिखाता हूँ गरीब को भी विदेश घुमा लाता हूँ मेरे को देखने में क्या जाता ... »

इंसानियत भूल जाते है

इंसान ही इंसानियत भूल जाते है जिसको मानते है भगवान उसको ही मार आते है ये सिर्फ भगवन को जानते है पर उनकी कहा मानते है चंद पैसो के लिए ये खुद बीक जाते है इस महामारी से भी कुछ ना सीखा उस मासूम के जान के बदले तुझे पैसा ही दिखा अरे मुर्ख उसके साथ एक नन्ही है जान ये तो सोचा होता चंद पैसो के बदले उस मासूम को देखा होता ऐसे कर्मो से ही धरती पे विनाश है आते इंसान ही इंसानियत है भूल जाते »

पता ना चलिया है

वक्त वक्त देख वक्त का पता ना चलिया है जब चले पता तब तक वक्त निकलया है सोच सोच के राह का पता न चलिया है जब चले पता तब तक मंज़िल छुटिया है क्रोध क्रोध में क्रोध का पता ना चलिया है जब चले पता तब तक रिश्ता चला गया है लोभ लोभ में लोभ का पता ना चलिया है जब चले पता तब तक सब ख़तम हो गया है मै मै में मै का पता ना चलिए है जब चले पता तब तक पुण्य ख़तम हो गया है – हिमांशु ओझा »

हठधर्मी

बापू बड़े दुविधा  में पड़ गए, लाडले ने सिंहासन का जो हट कर बैठे l एक सिंहासन दोनों मे कैसे बांटे, कलेजे के जो टुकड़े ठहरे l जमीन को धर्म में बांटे , भारती के सीने में खंजर से लकीर काटे l बापू यहां भी न रुके , महानता की लालसा मन मे थे पाले l रोते विलकते हिन्द पर एक और एहसान कर डाले , विषैले, गद्दार सांप को हिन्द के कंधे डाले l भविष्य के दंगे का एक विज बो गए  , हिन्द को नासूर जख्म दे गए l गंगा, यमुन... »

वक्त

मत कहो की वक्त नहीं कही वक्त न कह दे हम तो है पर तुम नहीं – हिमांशु ओझा »

प्यार एक तरफ़ा

खुदा ने सुनी मेरी जो आपको यहाँ पंहुचा गए हमे तो खबर ना हुई आप कब हमारे दिल में आ गए गहरे समुन्दर में प्यार की नईया पार हो जाये हमारी तो हां है बस उनकी भी हां हो जाये ज़िन्दगी में एक पल सुनहेरा आता है प्यार की घडी में इंतज़ार कहलाता है तुम्हारे बोल में भी एक नगमा हो गया तुम्हे हो ना हो हमे प्यार एक तरफ़ा हो गया ये दिल सनम तेरा हो गया तेरे लिए मेरा प्यार ग़हरा हो गया हमने अपने दिल को तेरी और कर लिया भले... »

अवसर

ये धरती पे अंधकार है छाया देख सूरज नया सवेरा है लाया तेरी ज़िन्दगी में नया अवसर है आया जो करे कोशिश अवसर उसने ही पाया कर कोशिश उस अवसर को पाने की कर कोशिश हर डर को हराने की तू भी जा सकता है चाँद पर बस देरी है हौसला जगाने की रह मत चुप एक बिल में खुलके कर जो हो तेरे दिल में पता नहीं कब मिले मौका कर कुछ अच्छा हर दिन में कुछ मिले ना मिले तेरी कोशिश करता चल भले ना मिले मंज़िल तेरे रस्ते सुहाने करता चल हि... »

भारती

भारत माता सुनो वीरों की कहानी, अपनो  का जो हुए शिकार l कालापानी सावरकर को मिला, हृदय तोड़ने वाला दर्द मिला l सहम उठा दिल मेरा, अनूठा देश प्रेम जो देखा l मन विभोर हो उठा, इतिहास के बदले स्वरूप जो देखा l सपूतों से इतिहास ने साजिश रचा, मै कुछ ना कर पाया, कुछ न कर पाया ll सुभाष का क्या बोलूँ , मेरे लिए दरदर भटकते रहा l पराक्रम से दुश्मनों को धूल चटा‍या, आजादी का पहला तिरंगा लहराया l उसे भी अपनो का धोख... »

वियोग

” वियोगी होगा शायद पहला कवि, दुःख से निकला होगा गायन ! गिर कर आसु़ंं अॉखो से चुपचाप, कविता बनी होगी कोई अनजान !” .. »

जन्मदिन

आज मेरा जन्मदिन है आप लोगो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया उसके लिए धन्यवाद् »

छोटी बहन

सुने घर में फिर बाजी किलकारी आंगन में पायल छनकारी टुकुर टुकुर देख आ रही छोटी बहन प्यारी सामने उसको पाए सारे दुःख दूर हो जाये जब भी वो मुस्कुराये खुशियों की लहर है आये फिर आयी खुशिया जो थी थमी आगई घर की लक्ष्मी बढ़ाई घर की रौनक जिसकी थी कमी तेरी मुस्कान पे दुनिया तेरे नाम हो जाये तू रोये तो पूरा घर है हिल जाये तुझको देख मिल जाती है खुशिया सारी मेरी बहन है प्यारी हिमांशु के कलम की जुबानी »

सूनापन

आकर अंधेरों में डराता है सूनापन मुझे सहारा चाहिए चिल्लाता है सूनापन एक ऐसा सहारा जो हर कदम पर साथ रहे मैं जब भी डगमगाऊ संभालने मैं उसका हाथ रहे। जो नदियों के भीतर का सौंदर्य मुझे दिखाएं जो आसमां के पार तलक मुझे ले जाए पहाड़ों के ऊपर नदियों के भीतर दूर बहुत दूर ले जाता है सूनापन । जो शब्द हीन होकर भी बोलने में समर्थ हो जो दिल की बात मन से तोलने में समर्थ हो जो बता जाएगी जिंदगी क्यों जी रही हूं मैं ... »

प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति और पर्यावरण मानव आज हो रहा है, आज स्वार्थ प्रधान प्रकृति और पर्यावरण का, नहीं है किसी को ध्यान प्रकृति ही देती है सबको, सुरक्षा और जीवन दान उसकी कृपा से ही, चहकता है सारा जहां जल, वायु, सूर्य, अग्नि व भूमि है बड़े महान जो देते हैं प्रतिदिन, सृष्टि को नया जीवन दान बरसात आती है समय पर, भर जाती है भंडार अन्न फल-फूल कंद, यह सब दे जाती है उपहार नदी, सरोवर व बाग, नव जीवन के है आधार जो मानव जाति ... »

Maa ka saya

Maa aaj bhi sunai deti hai teri aahat mujko, Abhi bhi yaad hai teri wo baate mujko, Himat deta hai maa tera saaya mujko, Maa ab bhi roshan hai teri yad se gar ke kamre, Roshani deta hai ab tak tera saaya mujko.. »

श्याम

अनजान सी रुक्मणि बेचैन सी मीरा राधा ही जाने श्याम की पीड़ा हिमांशु के कलम की जुबानी »

आजादी

सुभाष,भगत,आजाद ने, दे दी हमे आजादी ! वीरो के कुर्बानी रंग लायी, वन कर देश की आजादी !! अंत हुआ अत्याचारो के अत्याचार, टूटा गरूर गद्दारो के ! धरती भी झूम उठी वर्षो बाद, उन्हें मिली जो आजादी !! धूम मचाया रंग जमाया, गद्दारो को खूब नाच नचाया ! लाखों जुल्म सह के भी, त्यागे न हम अपनी आजादी !! गद्दारो को क्या खबर थी, कब टूट पड़ेगे हम उन पर ! हम सब के नस-नस में, लहू बन गयी थी आजादी !! लहू को हमने समझ कर पा... »

मैं मर्द कहाया फिरता हूँ

मैं मर्द कहाया फिरता हूँ, मैं मर्द कहाया फिरता हूँ चलता हूँ उल्टे राहों पर, लोगों को राह दिखाता हूं गड्ढों में गड्ढा खोदकर, मैं खुद को खूब बचाता हूं बच पाया फिर भी कभी नहीं, मैं बन बेसहारा गिरता हूं मैं मर्द कहाया फिरता हूँ…. मैं मर्द कहाया फिरता हूँ कर जाता हूँ जब पाप कभी, औरों का दोष दिखाता हूं सीख पाया कभी ना मर्यादा, दुर्जन को बहुत सिखाता हूं स्वार्थ स्वयं का साध सदा, सर्वज्ञ स्वयं को सम... »

Meri monjil

Meri monjil yah hai ki,ma ki bedona ko dur kar saku to pita ke kasto ko bhi. Meri monjil yah hai ki, anatho ke liye apno jesa bon saku to garibo ke liye sahara. Meri monjil yah hai ki, mujhse kisi ko dukh na pohuse bolki sabhi ke mon me khusi owr muh me hasi la saku. Meri monjil yah hai ki, mohilao ko apman nehi bolki somman de saku. Meri monjil yah hai ki, garibo ke rakshos ko nas karne ke liye m... »

गुरु

ना था रस्ते का पता ना थी मंज़िल की चाहत थके ज़िन्दगी से गुरु के चरणों में मिली राहत माता पिता ने चलना सिखाया मिला ना मंज़िल का कोई अता गुरु के चरणों में शीश झुकाकर मिला सही गलत का पता गुरु का रखो मान उनका ना करो अपमान गुरु के ज्ञान को धारण कर अर्जुन बन गया धनुर्धारी महान गुरु के ज्ञान को स्वीकार करो इस ज्ञान से अपना उद्धार करो हर क्षण इनका गुण गाकर इनके चरणों को प्रणाम करो गुरु के ज्ञान से सब ठीक हो ... »

क्यों

सावन मे सखी मन 💕 क्यों बहके । सारे पपीहा पेड़ पर क्यों चहके।। काली घटा प्रेम रुत क्यों ले आई। उसके आने से मन 💕 क्यों धड़के ।। सावन के 💧 बूंद गालो को क्यों चूमे। इस मौसम में अंग अंग क्यों फड़के।। »

दोस्ती

कभी बुलाये प्यार से कभी बुलाये मजाक से ज़िन्दगी की हर घडी ये साथ देती है दोस्ती होती ही ऐसी है दिल होवे गम में तो ये बात करे नरम में छोटी ख़ुशी में भी पार्टी मांगे जमके मूड चाहे जैसा हो ये मज़ाक करती है दोस्ती होती ही ऐसी है किसी से हुई मारपीट हो किसी ने कर दिया चीट हो ये उसको भी पछाड़ देती है दोस्ती होती ही ऐसी है ये ना बुलाये कभी नाम से दूसरा उड़ाए मजाक तो गया वो काम से हर बात में ये पास होती है दोस्... »

अन्नदाता की व्यथा

टुकड़े-टुकड़े हुई मेदिनी , कैसी ये लाचारी है । ऐसे उजड़े खेत कि जैसे , कोई विधवा नारी है । शीश पकड़ बैठा किसान है , प्रश्न हजारों साल रहे । कैसे अन्न उगाऊँ मैं यदि , सूखे जैसे हाल रहे । बिन बरसे ही मेघ सिधारे , प्यासी धरा हमारी है ।। ऐसे उजड़े खेत कि जैसे , कोई विधवा नारी है । कर्जदार था पहले से ही , धरती माता रूठ गई । कैसे मैं परिवार चलाऊँ , आस अन्न की टूट गई । व्यथा वंश की शूल चुभाए , भार हृदय प... »

श्री राम

कथा सुनाऊ पुरुषोत्तम श्री राम की विष्णु रूपी अयोध्या पति नाथ की त्रेता युग में जनम हुआ राजा दशरथ के महल में अयोध्या हुआ पूरा चहल पहल में सुमित्रा से जनम हुआ लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जनम हुआ कैकेयी पुत्र भरत का खुशियों की लहर उठी आये भाई श्री राम के ग्रंथो का ज्ञान मिला गुरु वशिस्ठ की कृपा से शास्त्रों का ज्ञान मिला गुरु विश्वामित्र की दया से आयी घडी खुशियों की सबका जीवन सफल है हो गया राम का सीता से ... »

अन्नदाता की व्यथा

“अन्नदाता की व्यथा ” टुकड़े-टुकड़े हुई मेदिनी , कैसी ये लाचारी है । ऐसे उजड़े खेत कि जैसे , कोई विधवा नारी है । शीश पकड़ बैठा किसान है , प्रश्न हजारों साल रहे । कैसे अन्न उगाऊँ मैं यदि , सूखे जैसे हाल रहे । बिन बरसे ही मेघ सिधारे , प्यासी धरा हमारी है ।। ऐसे उजड़े खेत कि जैसे , कोई विधवा नारी है । कर्जदार था पहले से ही , धरती माता रूठ गई । कैसे मैं परिवार चलाऊँ , आस अन्न की टूट गई । व्... »

कोरोना

चंद लम्हो की ज़िन्दगी में अब और क्या- क्या होना है ब्रष्टाचार क्या कम था जो आगया कोरोना है गरीब खा रहे मांगके और अमीरो के पास सोना है मिडिल क्लास की किस्मत में तो रोना ही रोना है इस परेशानी में पूरा जाहां है रो दिया कितनो ने अपने परिवार को है खो दिया सारे देशो में ये लॉकडाउन है शुरू हो गए जो जहा थे वो वही है रुक गए घर जाते वक़्त कुछ रस्ते में ही मर गए और घरवाले है की घर में बैठे बैठे थक गए फिर भी इर... »

भुआ

बैठे थे गुमसुम से एक टक निहार के दादी आयी बोली फिर भुआ आ रही है ससुराल से ये सुनके खुश हुए की भुआ हमारी आएगी उनके आने से इस घर की रौनक बढ़ जाएगी अपने साथ वो मेरे भाइयो को भी लाएगी हम सबको वो खेल खिलाएगी मेरे लिए वो स्पेशल ड्रेस भी लाएगी भुआ भतीजे का तो रिश्ता ही न्यारा है एक रिश्ते में ये कई रिश्ते निभाती है प्रेम बरसाने में तो वो माँ बन जाती है बड़ी बहन की तरह हर मुश्किल में मदत कर जाती है तारीफ मे... »

दादी माँ

आंगन में बैठी एक टक निहार लेती है चलती धीरे पर काम तेजी से कर लेती है पढ़ना कम आता है पर दुनिया का पाठ पढ़ा देती है डॉक्टर नहीं पर हर दर्द ठीक कर देती है दादी माँ की बात ही निराली है तुम्हे मिले सबसे ज्यादा इसलिए बादमे वो खाती है तुम सो चैन से इसलिए बादमे वो सोती है दिखा ख़ुशी का चेहरा अपने दुःख में अंदर ही अंदर रोती है साक्षात् भगवन भी इनसे मार्ग दर्शन लेता है सफल वो ही ज़िन्दगी में जो इनसे आशीर्वाद ... »

उठ भी जा ना

चल अब उठ भी जा ना अभी कुछ काम नहीं फिर भी क्यों तू थकता है मुश्किलों को देख के इतना क्यों डरता है सिख कुछ सूरज , चाँद से खुद वक़्त पे है आते पुरे जहान में वक़्त पे रौशनी है फैलाते अगर ये नहीं उठते वक़्त पे तो कहा तू उठा करता ना कही देख पाता सिर्फ सो जाया करता चल अब उठ भी जा ना सिख किसान , डॉक्टर , सैनिक से कुछ कितनी मेहनत करता है सब काम के बाद भी समय पे ये उठता है मेहनत करने वाला ही चैन की नींद सोता ... »

दिल तुम्हारी और

आज भी वो दिल तुम्हारी और जाता है जो तुमने तोड़ दिया था आज भी तुम्हारे गुण गाता है जिसका मुँह चुप कर दिया था आज भी तुम्हारी गलियों में रहता है जिसको कही और छोड़ दिया था ये दिल सब जनता है पर कहा मानता है ये आज भी तुम्हारी आवाज सुनना चाहता है जिस से तुम बोलती नहीं खूब समझाया पर माना नहीं वो किसी की दिल लगी को सजा समझने लगे , दो पल रूत के गुज़ारे , तो जफ़ा समझने लगे अपने दिल से बोला आ तुझे जोड़ देता हु ज़िन... »

कोरोना चालीसा

कोरोना कोरोना कहते हो कोरोना से क्यों डरते हो। शाम सवेरे जब देखो कोरोना चालीसा भजते हो।। कोरोना के डर से तुम कोरोना की उपासना करते हो। सोते जागते उठते बैठते कोरोना चालीसा भजते हो।। कहे कवि डट के मुकाबला करना तुम कहाँ सिखते हो। भूखा प्यासा चौक चौराहे पे कोरोना चालीसा भजते हो।। »

दिल

दिल में जगह की कमी नहीं होती यह तो खुला आसमान है खूब पंख फैलाओ यहाँ बाटने वाली जमीन नहीं होती »

हम सब

आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये हम सब एक हो जाये ये जात पात सब मिट जाये आओ सब अपने दुःख सुख में एक हो जाये आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये हमारे सपनो में भी पंख लग जाये खुद खुश रहे और दुनिया में ख़ुशी फैलाये हम ज़िन्दगी में खूब उचे उड़े पर धरती को ना भूल जाये इस दुनिया के समुन्दर में तेर हम सफलता के मोती ले आये कभी डॉक्टर बन जाये तो कभी सैनिक बन जाये अपने देश के लिए कुछ कर जाये हम सब एक हो जाये... »

……किसी से कम है?

मेरे देश की मिट्टी किसी सोने से कम नहीं। खेतो में लगी फसल किसी हीरे मोती से कम नहीं।। यही धरती की गोद में खेले पले हुए हम जवां। हिमालय से निकली गंगा किसी अमृत धारा से कम नहीं।। हमारे देश पे बुरी नजर रखने वाले जरा सुन तो ले। शहीदों के लहू से रंगी यह धरती किसी चंदन से कम नहीं।। »

नये जमाने की नयी बेटियाँ

कामयाबी के डगर पे चल पड़ी है, नये जमाने की नयी बेटियाँ। बेटी से नफरत करने वाले जालीम समाज, देख आसमां में छा गयी आज की नयी बेटियाँ।। वो जमाना गया जब हम जुल्म के शिकार थे, अब ईंट के जवाब पत्थर से दे सकती है बेटियाँ। हम से है जमाना जमाने से हम नहीं, यही एलान करती है आज की नयी बेटियाँ।। बेटी को जन्म से पहले ही माड़ने वाले, जरा सोच तेरी माँ भी किसी की रही होगी बेटियाँ । क्या होता जब माड़ देती तुझे वह अ... »

mere dil

मेरे दिल से आज एक आवाज आयी बोलै बहार मत जाना मेरे भाई वरना पुलिस करेगी पिटाई पुलिस और डॉक्टर कर रहे है कोरोना से लड़ाई कोरोना के चाकर में कुछ की रुक गयी है शादी और सगाई सबकी रुक गयी है कमाई सबको मिलकर हटानी है इस देश से कोरोना की परछाई सरकार की मनो बात जो उन्होंने है बताई आओ घर में रहकर जीते इस कोरोना की लड़ाई मेरे दिल से आज एक आवाज आयी हिमांशु के कलम की जुबानी »

अब पछताए होत क्या (कोरोना)

कोरोना से न करना यारी। यह है जान लेवा बिमारी।। कितने को डसा ए काला नाग। आज पर गया हम सब पे भारी।। क्यों सो चूके थे हम और तुम। चुपके से कोरोना का वार था करारी।। अच्छा होता काश!! हम संभल जाते। शायद ही देखने को मिलता ए महामारी।। »

मेरे पास

धीरे से मेरे पास आ जाता है कोई मेरे दिल को लुभा जाता है कोई मेरे कान में मीठे स्वर बोल परछाई बन जाता है कोई मेरा मन ज़रा बेचैन है उसको ज़रा सा भी नहीं चैन है दर्शन दे मन शांत कर जाता है कोई धीरे से मेरे पास आ जाता है कोई हिमांशु के कलम की जुबानी »

♥️♥️वो माँ होती है ♥️♥️

♥️♥️mother’s day special♥️♥️ जो नज़रो से परख ले वो माँ होती है । दर्द को दिल में जो रख ले वो माँ होती है । कर कोई काम तू बुरा खुदा से चाहे हो छुपा जो तेरा चेहरा भांप ले वो माँ होती है । जो तुझको जन्म दे तेरे मुख को चूम ले हो तू कष्ट में तो रोती है वो माँ होती है । जो कष्ट तेरे छीन ले चुभते काँटे बीन ले तुझपे प्यार वार दे वो मां होती है । जब कभी तू उदास हो भले कोई ना पास हो जो सदैव साथ दे वो म... »

Maa

🌹*मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं*🌹 💕 माँ- दुःख में सुख का एहसास है, माँ – हरपल मेरे आस पास है। माँ- घर की आत्मा है, माँ- साक्षात् परमात्मा है। माँ- आरती, अज़ान है, माँ- गीता और कुरआन है। माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है, माँ- उस रब का ही एक रूप है। माँ- तपती धूप में साया है, माँ- आदि शक्ति महामाया है। माँ- जीवन में प्रकाश है, माँ- निराशा में आस है। माँ- महीनों में सावन है, माँ- गंगा सी पावन है।... »

माँ

Happy mothers day हर सफलता के पीछे माँ का सहारा है दोस्तों डूबती नैया पार लगदे वो किनारा है दोस्तों माँ के आशीर्वाद से जीवन सफल हो जायगा माँ के प्यार से सब ठीक हो जायगा सेवा करो माँ की जीवन का हर शून्य ख़तम हो जायगा अपमान मत करो माँ का वर्ण हर पुण्य ख़तम हो जायगा माँ शब्द बोलने से चारो धाम हो जायगा हर व्यक्ति बस यही गुण गाएगा दोस्तों हर सफलता के पीछे माँ का सहारा है दोस्तों written by – himans... »

मां तू मां है

“माँ तू माँ है” योगेश ध्रुव”भीम” ************************ माँ तू जननी है, तूने मुझे, कोख में, पाला, नौ माह तक, जन्म दी, इस वसुंधरा का, दर्शन कराई, जननी हो न, खुद दुख सहकर, सुख का भोग कराई, हाँ माँ, नदियों के नीर की, निर्मलता की धार हो, शीतल चन्दन हो तुम, तू ही तो हो, मुझे चलना सिखाई मेरे हर पगो का सहारा बनी, मुझे बातें करना सिखाई, हाँ माँ, मुझे सिखाई बाते करना, मैं आपके बाग... »

इम्तिहा

“इम्तिहा” योगेश ध्रुव “भीम” “जिंदगी की डोर खिंचते चल पड़े हम, मंजिल की तलाश पैरो पर छाले पड़े” “बिलखते हुए सवाल लिए पापी पेट का, दर-दर भटकते लेकिन हल ढूढ़ते ढूढ़ते” “चिराग जलाते हुए जीने की तमन्ना लिए, दर्द बयाँ करू कैसे चिराग तु बुझाते चले” “डगर भी कठिन इम्तिहा की मौन है हम, मेरे परवर दिगार रहम नाचीज पे तू कर” »

kuch baat to hai tum me

Kuch baat to hai tum me jo mujhe tumhari or le jaati hai Tumhari rooh ko meri rooh se har waqt milati hai Yaad me tumhari kabhi hasati hai to kabhi rulati hai Badi kambhaqt hai tumhari yaad sapne me bhi aa jaati hai Jaha jau waha tumhari parchai dikh jati hai Tumhare naino ki sundarta is dil me samati hai Tumhari katilana muskan pe jaan si atak jaati hai Kuch to baat hai tum me jo mujhe tumhari or... »

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