आओ दिवाली ऐसी मनाए ,
थोड़ी खुशियां हम भी लुटाए।
जो तरसे इन खुशियों को इन,
आओ दिवाली उन सब की मनाए।
थोड़ी मिठाई हम भी खाएं,
थोड़ी उनमें बांट के आए।
हंसते चेहरे देखोगे जब,
खुशियां भीतर पाओगे तब।
आओ दिवाली ऐसी मनाए,
थोड़े पटाखे उन्हें दे आए।
दूर सड़क जो देख निहारे,
पटाखे ना होने पर जो मन में हारे।
उनकी हार को जीत बनाएं,
थोड़ी खुशियां उन्हें दे आए।
उनकी संग भी दिवाली मनाए।
आओ दिवाली ऐसी मनाए!
कुछ नये कपड़े बांट के आए,
पहने उनको देखोगे जब ,
हृदय तुम्हारा जगमग होगा,
चारों तरफ आनंद ही होगा।
आओ दिवाली ऐसी मनाए
थोड़ा अन्न हम बांट के आएं,
हम भी खाएं उन्हें भी खिलाएं,
खिलखिलाती हंसी हम पाएं।
आओ दिवाली अब ऐसी मनाए।
निमिषा सिंघल
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