तुम मुझे अपनी वाणी से हताहत कर सकते हो
अपनी गंदी नजरों से मुझे काट सकते हो
अपनी नफ़रत से मुझे मार सकते हो
लेकिन मैं हर बार ऊठूंगी
आग की तरह
आग की तरह
Comments
10 responses to “आग की तरह”
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बढ़िया
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Shukriya
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वाहः
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Thanks….u left ur name blank..why?
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ज़िंदगी में कभी हार ना मानना ही जीने की कला है… nicely penned..
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Thank u very much
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Waah
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वाह बहुत सुंदर
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Good
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Gr8
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