आज तूफानों से कह दो
आप भी पीछे रहो मत,
धूल तो उड़ ही रही है,
आप यूँ शरमाओ मत।
हम हवा के हल्के झोकों
से नहीं घबराते हैं,
यदि स्वयं तूफान आये
तब भी हम भिड़ जाते हैं।
नींद में भी होश रखते हैं,
संभल जाते हैं हम,
आप तूफानों से कह दो,
इस समय जागे हैं हम।
आज तूफानों से कह दो
Comments
5 responses to “आज तूफानों से कह दो”
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Very very nice poem
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कवि सतीश जी की तूफ़ानों से सामना करने की बहुत ही सुन्दर कविता , परेशानियों में उत्साह वर्धन करती हुई वीर रस से सुसज्जित
बहुत सुंदर प्रस्तुति -

Beautiful poem
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बहुत ही सुंदर कविता
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बहुत ही बढ़िया कविता
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