आतंक पालने वाले

आतंक को पालने वाले मत हमे आँख दिखाओ
घुन की तरह खोखला कर रहे हैं तुम्हें बचाओ
मानवता के लिए अभिशाप है आतंकवाद
जरा भी मानवता हो तो इसे दुनिया से हटाओ

Comments

4 responses to “आतंक पालने वाले”

  1. आपकी लेखनी को नमन है
    आपने आगमन से हर्षित सावन है

  2. आपके आने से सावन प्रसन्न है। आप शब्दों के जादूगर हैं। mind blowing कविताएं लिखते हैं। ऐसे ही लिखते रहिये। अच्छे से रचना को गढ़ते हैं।

  3. Ekta Gupta

    बहुत शानदार पंक्तियां

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