आतंक को पालने वाले मत हमे आँख दिखाओ
घुन की तरह खोखला कर रहे हैं तुम्हें बचाओ
मानवता के लिए अभिशाप है आतंकवाद
जरा भी मानवता हो तो इसे दुनिया से हटाओ
आतंक पालने वाले
Comments
4 responses to “आतंक पालने वाले”
-

आपकी लेखनी को नमन है
आपने आगमन से हर्षित सावन है -
बहुत खूब
-

आपके आने से सावन प्रसन्न है। आप शब्दों के जादूगर हैं। mind blowing कविताएं लिखते हैं। ऐसे ही लिखते रहिये। अच्छे से रचना को गढ़ते हैं।
-

बहुत शानदार पंक्तियां
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.