शिक्षा की खदानें बंद करो
डिग्री बेचने वाली दुकानें बंद करो
छात्रों को डालो जेलों में
शिक्षकों की तनख्वाहें बंद करो
ना लूटो हमको शिक्षा के नाम से
ज़रा डरो राम के नाम से
व्यापार मत करो तुम ज्ञान की वृद्धि पर
कंधर पड़े हैं तुम्हारी बुद्धि पर
जब शिक्षा का कोई अर्थ नहीं
तो हम समय करेंगे व्यर्थ नहीं
लगाएंगे चाय और पकौड़े की दुकान
आत्मनिर्भर बन हो जाएंगे महान।
आत्मनिर्भर बन
Comments
12 responses to “आत्मनिर्भर बन”
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अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना शतप्रतिशत यथार्थ
वर्तमानकालिक शासन व्यवस्था पर कटाक्ष-

यह हम युवाओं की व्यथा है
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बहुत ही सच
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धन्यवाद
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बहुत ही सच्चाई युक्त लाजवाब अभिव्यक्ति। आपने सच को प्रकट किया है। वाह
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धन्यवाद
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सच्चाई के साथ साथ युवा वर्ग के रोष का सटीक चित्रण ।
वर्तमान शासन व्यवस्था की पोल खोलती समसामयिक रचना ।
बहुत सुंदर प्रज्ञा..-

धन्यवाद
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बहुत ही उम्दा, यथार्थ परक रचना
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धन्यवाद
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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