आपका जब संग है

खूबरसूरत जिन्दगी
आपके कारण ही है,
आप हैं, तब है सभी कुछ
जिन्दगी में रंग है।
आप इस सूखी धरा में
प्रेम की बरसात हैं,
और क्या अवलम्ब खोजूँ
आपका जब संग है।
हों भले पथरीली राहें
हर तरफ कंटक पड़े हों,
भय नहीं पग को तनिक भी
आपका जब संग है।
यूँ तो चंचल मन की ढेरों
ख्वाहिशें रहती हैं लेकिन,
ख्वाहिशें सब गौण सी हैं
आपका जब संग है।
उलझे केशों से था जीवन
आप जब तक दूर थे
आप अब मन में बसे
बेढंग में भी ढंग है।
खूबरसूरत जिन्दगी
आपके कारण ही है,
आप हैं, तब है सभी कुछ
जिन्दगी में रंग है।
– — डॉ0 सतीश चन्द्र पाण्डेय

Comments

8 responses to “आपका जब संग है”

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  1. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    खूबसूरत अभिव्यक्ति रचना के माध्यम से

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      बहुत सारा आभार

  2. प्रेम भरी अभिव्यक्ति

    1. Satish Pandey

      बहुत सारा धन्यवाद

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