आपकी पंक्तियों से

आपकी पंक्तियों से मन हुआ गदगद हमारा,
इस तरह के स्नेह का भूखा रहा है मन हमारा।
नेह यह, आशीष यह यूँ ही रहे सिर पर हमारे,
प्रेम बढ़ता ही रहे यह चाहता है मन हमारा।
@शास्त्री जी

Comments

7 responses to “आपकी पंक्तियों से”

  1. Geeta kumari

    ✍️👌👌👏👏

  2. बहुत खूब
    शास्त्री जी को समर्पित
    प्रेम और सम्मान भरी पंक्तियां…
    शास्त्री जी हमेशा बिना
    किसी पक्षपात के सबकी हौसलाअफजाई करते हैं

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  3. अति सुंदर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

Leave a Reply

New Report

Close