आवाज़ तेरी

जब सुनाई नहीं देती यहाँ किसी को चीख भी किसी की,
तो कौन सुनकर आऐगा आगे यहाँ अब खामोशी की आवाज तेरी,

जिस तरह मुश्किल है बहती हवा को छू पाना,
उसी तरह मुम्किन नहीं सुन पाना साँसों की आवाज तेरी,

जो देख कर भी कर रहे हैं अनदेखा तुझे,
उन्हें कहाँ सुनाई देगी ख़्वाबों की आवाज तेरी,

भुला कर सो गए हैं चैन की नींद जो तेरा वजूद,
तो क्या बना पाएंगे वो तेरी तस्वीर भूल कर यादों की आवाज तेरी॥
राही (अंजाना)

Comments

4 responses to “आवाज़ तेरी”

  1. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    Bahut Khoob

  2. Abhishek kumar

    Nice

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