*आशा का एक दीप जलाए*

बैठे हैं आशा का दीप जलाए,
उम्मीद की लौ मन में लगाए।
व्यथा का तिमिर अड रहा,
नैराश्य का आंचल बढ़ रहा
नेत्र नीर नैनों में आए,
प्रेम की दिल में ज्योत जलाए
मन के द्वार पर,
सजा कर स्वप्नों के तोरण,
ढूंढती है आंखें अब आपको
आशा का एक दीप जलाए।।
_____✍️गीता

Comments

6 responses to “*आशा का एक दीप जलाए*”

  1. बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

  2. Anu Singla

    खूबसूरत भाव

    1. धन्यवाद अनु जी

  3. Satish Pandey

    सजा कर स्वप्नों के तोरण,
    ढूंढती है आंखें अब आपको
    आशा का एक दीप जलाए
    —— बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां, बहुत ही संजीदा भाव, वाह

    1. Geeta kumari

      ख़ूबसूरत समीक्षा हेतु खूब सारा धन्यवाद सर

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