आस पलती रही

वक्त थम सा गया, और ज़िन्दगी चलती रही।
तेरी याद बहुत आई, तेरी कमी खलती रही।
फ़िर ढूंढ़ने निकल पड़े तुझे, आंख के आंसू मेरे।
खैर, तू मिला नहीं, पर मिलने की आस पलती रही।

Comments

14 responses to “आस पलती रही”

    1. Geeta kumari

      Thank you very much mam.

  1. Satish Pandey

    वाह, कितनी जबरदस्त प्रतिभा है, अतिसुंदर पंक्तियाँ

  2. Geeta kumari

    अरे, सतीश जी …. बहुत बहुत आभार सर 🙏
    आपकी समीक्षा सकारात्मकता की और ही ले जाती है।

    1. आपकी कलम से बहुत अच्छा साहित्य सृजन हो रहा है। बहुत बढ़िया लिखती हैं आप

  3. Geeta kumari

    बहुत बहुत धन्यवाद ईशा जी।
    आप की सुन्दर समीक्षा के लिए हार्दिक आभार

  4. Priya Choudhary

    बहुत खूब 👏👏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया जी 🙏

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत सुंदर

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏

  6. Devi Kamla

    बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद मैम🙏

  7. Piyush Joshi

    कमाल की लेखनी

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