आहिस्ता से बोल दो
क्या कह रहा मन
करोगे मुहब्बत या
दुत्कार दोगे।
इकबाल है हमारा
मिले आप पथ में
इजहार कर दिया,
क्या स्वीकार लोगे।
आहिस्ता से बोल दो
Comments
15 responses to “आहिस्ता से बोल दो”
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Thank you
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बहुत खूब
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धन्यवाद जी
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Very nice
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Thank you ji
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Very nice
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Thanks
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Beautiful lines…. श्रृंगारिक रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद औऱ आभार
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वाह वाह क्या बात है
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सादर धन्यवाद जी
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Nice lines
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Thank you ji
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वाह क्या बात है, बेहतरीन
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