आड़े आता है

आगे बढ़ने की ललक में
घमंड आड़े आता है,
इंसान बढ़ना चाहता है
दम्भ आड़े आता है।
जिसके भीतर बारिश तो हो
पर दम्भ उग आए,
उसे साफ करना होता है
वरना वह आड़े आता है।
बारिश का मौसम धीरे-धीरे
ठंडे जाड़े लाता है,
फूलों को उगने में मन का
कंटक आड़े आता है।

Comments

2 responses to “आड़े आता है”

  1. रोहित

    बहुत सुंदर

  2. बहुत सुन्दर और उच्च स्तरीय रचना

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