इश्क़ के सफर में

ज़िन्दगी के सफर में
कई हमराह मिलते हैं।
कहीं पे वाह मिलते हैं
कहीं पे आह मिलते हैं।।
सफर में इश्क़ के
कुछ विरले होते हैं
जिन्हें आखिर में भी आकर
मंजिल – ए- चाह मिलते हैं।।

Comments

4 responses to “इश्क़ के सफर में”

  1. Satish Pandey

    बहुत समय बाद
    सुनाई दिए आपके सुनहरे बोल
    मन प्रसन्न हुआ,
    पढ़कर पंक्तियाँ अनमोल।
    —– आदरणीय शास्त्री जी की सुमधुर रचना। वाह

    1. बहुत बहुत धन्यवाद पाण्डेयजी
      कभी कभी पाठक बनने में भी आनन्द मिलता है

  2. Geeta kumari

    वाह भाई जी, बहुत ही सुंदर पंक्तियां, जिंदगी की सच्चाइयों को बयान करती हुई मधुर रचना

  3. सुन्दर रचना

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