ज़िन्दगी के सफर में
कई हमराह मिलते हैं।
कहीं पे वाह मिलते हैं
कहीं पे आह मिलते हैं।।
सफर में इश्क़ के
कुछ विरले होते हैं
जिन्हें आखिर में भी आकर
मंजिल – ए- चाह मिलते हैं।।
इश्क़ के सफर में
Comments
4 responses to “इश्क़ के सफर में”
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बहुत समय बाद
सुनाई दिए आपके सुनहरे बोल
मन प्रसन्न हुआ,
पढ़कर पंक्तियाँ अनमोल।
—– आदरणीय शास्त्री जी की सुमधुर रचना। वाह-
बहुत बहुत धन्यवाद पाण्डेयजी
कभी कभी पाठक बनने में भी आनन्द मिलता है
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वाह भाई जी, बहुत ही सुंदर पंक्तियां, जिंदगी की सच्चाइयों को बयान करती हुई मधुर रचना
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सुन्दर रचना
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