यूँ ही सिलसिला चलता रहा
कभी मैं कभी वो रूठता रहा
टूटने लगे दिल बेतहाशा
मगर इश्क आँच पर पकता रहा..
इश्क आँच पर पकता रहा…
Comments
14 responses to “इश्क आँच पर पकता रहा…”
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वाह, बहुत ख़ूब
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Thanks
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वाह वाह, श्रृंगारिक रचना, जद्दोजदह के बावजूद प्रेम के जिंदा रहने की रचना, बहुत ही लाजवाब।
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Thanks
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वाह! वाह!
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Thanks
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Nice
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Thanks
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सुंदर
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Thanks
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Thanks
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बहुत उम्दा
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धन्यवाद
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