इश्क

तुम्हारे प्यार में मैं क्या से क्या हो गया,
कभी मिट्टी का दीया कभी मटका बन गया,
जब देखा तुम्हारो हाथों में गैर का हाथ।
मैं फौलादी मिट्टी का इंसान टूट कर बिखर गया।।

महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

5 responses to “इश्क”

  1. Satish Pandey

    सुंदर

  2. 😃😃😃😃👌👌

  3. देश अंदर व्यंग किया है

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