इस बार अगर ठुकरा दिया तूने
तो फिर कभी लौटकर ना आएगे
चली गई साँस भी मेरी तो भी
तुझसे कंधा ना लगवाएगे….
इस बार
Comments
7 responses to “इस बार”
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बहुत ही भावपूर्ण
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हृदय स्पर्शी पंक्तियां
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Waah waah bahut khoob
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इतनी नफरत भी अच्छी नहीं। लचना लाजवाब है।
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मुझे खेद है लचना की जगह रचना पढ़े ।
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चली गई साँस भी मेरी तो भी
तुझसे कंधा ना लगवाएगे….
अत्यंत गहरा भाव है। श्रृंगार के वियोग पक्ष का बखूबी चित्रण है। अंत स्थिति तक की चेतावनी बड़ी सहजता से प्रकट हुई है। -
अतिसुंदर
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