उनकी नज़र

हमें देखकर वो मुस्कुराने लगे,
उन्हें देखकर हम शरमाने लगे
जब मिली उनसे नज़र से नज़र
हम हो गए बेखबर
तो यह आलम हुआ….
वो धीरे-धीरे पास आने लगे
हम घबरा कर दूर जाने लगे
दूर भी तो जाने ना दिया
हमे रोक लिया कुछ गुनगुना कर
हम शरमा कर नज़रें चुराने लगे..
_____✍️गीता

Comments

6 responses to “उनकी नज़र”

  1. हमें देखकर वो मुस्कुराने लगे,
    उन्हें देखकर हम शरमाने लगे।
    बहुत खूब, अति खूबसूरत रचना

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

  2. प्रेम भरी, लहजा सुंदर और लयात्मकता का संचार

  3. समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

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