उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई……

मिले थे फिर से तो, पर बात न होने पाई

उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई।

बुझ गए थे सभी चिराग मगर इक न बुझा

तो हवा जा के आंधियों को साथ ले आई।

जंहा से दूर निकल आये थे, वहीं पहुंचे

मेरे सफर में हर इक बार उसकी राह आई।

अपने हालात पे खुद रोये और खुद ही हंसे

हमीं तमाशा थे और हम ही थे तमाशाई।

मेरे हर दर्द से वाकिफ है आस्मां कितना

हम न रोये थे तो बरसात भी नहीं आई।

जिंदगी भर उनकी हर याद संभाले रक्खी

उम्र भर इस तरह हम उनके रहे कर्जाई।

~~~~~~~~सतीश कसेरा

Comments

11 responses to “उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई……”

  1. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    कह न सके हम कभी वो बात उनसे
    जाने कैसे आज वो लबों पर आई

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Mohit

  2. Panna Avatar

    मिले कई मर्तबा, बातें भी कई बार हुई
    मगर उनसे दिल की बात, कभी हो ना पाई…

  3. Panna Avatar

    nice poem satish ji

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Panna

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Ankit

  4. राम नरेशपुरवाला

    Good

  5. Satish Pandey

    Waah

  6. Satish Pandey

    Very nice

  7. अद्भुत लेखन

Leave a Reply

New Report

Close