तराश लेता हूँ सामने वाले की फितरत ...... बस एक ही नज़र में ..... जब कलम लिख देती है , हाल - ए - दिल .... तो कोई फ़र्क नहीं रहता ..... जिंदगी और इस सुख़न - वर में....

11 Comments

      1. इक बार शरीक हुए थे हम किसी महफ़िल में
        उनको देखा पहली दफ़ा,
        चढा रंग ऐसा कि
        अब तक उतरा नहीं
        अब कोई रंग चढने की गुंजाईश नहीं….

      2. पहले से ही शरीक है हम हर उस महफिल में
        जिसमें आप हो और आपके अल्फ़ाज हों

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