एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे,

एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे,

ये दर्द ज़फ़ा का तेरे संघ सहने दे.

ऐसे न नज़रे चुरा मुझसे,हूँ मै आखिर तेरा दीवाना,

है जब तक साँस बाकि,तब तक तो तेरे इश्क़ में मुझको जलने दे.

ऐसे न जुदा कर खुद को मुझसे ,

हूँ मै एक बंजारा,मै चला गया तो वापस न आनेवाला

तेरी बाँहों मुझको रहने दे,

एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे,

M.A.K

Comments

10 responses to “एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे,”

  1. Aaiye mehmoodazmi bhai aapka swaagat hai…

  2. बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां लिखी हैं आपने

    1. Mehmoodazmi khan

      Sukriya

      1. मोस्ट वेलकम

  3. Geeta kumari

    सुंदर अभिव्यक्ति, बहुत सुंदर रचना

    1. Mehmoodazmi khan

      Sukriya

  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    1. Mehmoodazmi khan

      Thanks

  5. Satish Pandey

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Mehmoodazmi khan

      Thanks

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