आ कर कब्र पे बेरहम एक बूंद 💧 आंसू गिरा दिया।
बिजली चमक के गिर पड़ी सारा जिस्म जला दिया।।
एक बूंद
Comments
5 responses to “एक बूंद”
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सुंदर
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भावुक रचना…
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वाह
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उच्च स्तर की संवेदना प्रस्फुटित हुई है , जीते जी न चाहने वाला मृत्यु के बाद दिखावटी आंसू गिराए तो वे आँसू तापित बिजली के गिरने का अहसास कराते हैं। बहुत खूब
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2 पंक्तियों में बहुत कुछ कह गए अमित जी आप इसे कहते हैं गागर में सागर भरना
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