एक सी बात कहां

हमारी और उनकी
एक सी बात कहां,
वो हैं सच के पुजारी
झूठ की बोरियां हम।
रात सोती है दुनियां
जागते खामखां हम
दिल्लगी कर न पाए
बन गए बेवफा हम।
शक उठा आज मन में
हमारे प्रति उनके
तड़पते रह गए हम
याद में रोज जिनके।

Comments

13 responses to “एक सी बात कहां”

  1. सुन्दर पंक्तियां

    1. सादर धन्यवाद जी

  2. बहुत सुंदर

    1. सादर धन्यवाद जी

  3. Geeta kumari

    परेशान व्यक्ति के हृदय के भावों का यथार्थ चित्रण किया है कवि ने।
    किन्तु कभी कभी नाराज़ दोस्त से बात करने से गलतफमियां दूर हो जाती हैं…… क्षमा करना ये मेरे व्यक्तिगत विचार हैं।

    1. बहुत सुन्दर समीक्षा, आपकी समीक्षा शक्ति को सैल्यूट, आपके व्यक्तिगत विचार हमारे विचारों से दुराव नहीं रखते हैं।, बल्कि सामंजस्य रखते हैं। इसलिए आपके प्रत्येक विचार का स्वागत है। यह शेरो-शायरी का दौर चल रहा था, सो चलते चलते परानुभूतिक संवेदना थी, अंकित हो गई,

      1. Geeta kumari

        🙏🙏

  4. MS Lohaghat

    बहुत ही बढ़िया

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

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