ए ज़िन्दगी अब तेरी
आरज़ू ना रही
मेरी सासें इक डोरी सी हैं
पर मन की वो तिजोरी ना रही
अब तक तो गनीमत थी पर अब तो
माँ भी सुनाती है
तू मेरी थी पर अब मेरी ना रही
ए ज़िन्दगी अब मुझे
तेरी ज़रूरत ना रही।
ए ज़िन्दगी
Comments
12 responses to “ए ज़िन्दगी”
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Nice
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थैंक्स
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Nyc
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थैंक्स
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Nice
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धन्यवाद
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Nice poem
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थैंक्स
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वाह
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धन्यवाद
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Good one
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🙏🙏
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