समय के साथ समझ बदल जाती है
चाहने वालों की चाहत बदल जाती है
प्यार करने वाले गलतियां सहित अपनाते हैं
भरोसा है जिसपर कभी तोहमत न लगाते हैं
ऐतवार हो तो प्यार हो ही जाता है
दर्द लेकर भी ये कष्ट से बचाता है
ऐतवार मां जैसा कहां है किसी में
अद्वितीय चीज है इस जग जहां में
आखिरी सांस तक निज संतान पर
ऐतवार करती है न शक है जिस पर
ऐतवार हो तो कीचड़ कमल बन जाता है
चाय केतली छोड़ विश्व सिंघासन पाता है
ऐतवार
Comments
5 responses to “ऐतवार”
-

True
-
मां के सम्मान में सुंदर प्रस्तुति
-
सुंदर
-
👌👌👌
-

बेहतरीन
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.