“बलात्कार है अक्षम्य अपराध”
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चीख-चीखकर
पुकारा उसने,
पर कोई सुनने ना आया…
तोड़ती रही वह दम अपना,
पर कोई लाज बचाने ना आया…
वैशी-दरिंदे झपट पड़े,
उनको जरा भी तरस ना आया…
क्या औरत का जिस्म ही है
उसका बैरी !
यह अब तक प्रज्ञा’ को समझ ना आया..
क्यों नहीं मिलता नारी को
देवी का सम्मान,
दम तोड़ दिया जिसके कारण
वह तो हैं हैवान…
ऐसे हैवानों को फाँसी होनी चाहिए
यह नियम पूरे देश में
लागू होना चाहिए…
देश की हर बेटी सुरक्षित और
निडर होनी चाहिए,
नारी को सम्मानजनक
दर्जा मिलना चाहिए…
ऐसे हैवानों को फाँसी होनी चाहिए
Comments
6 responses to “ऐसे हैवानों को फाँसी होनी चाहिए”
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यथार्थ लिखा है आपने
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आपका धन्यवाद
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बहुत ही दर्दनाक व मर्मिक अभिव्यक्ति । सचमुच ही ऐसे लोगों को फांसी होनी चाहिए।
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जी बिल्कुल दी…
काश ! ये कानून बन जाए
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यथार्थ पर आधारित मार्मिक अभिव्यक्ति
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अतिसुंदर भाव
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