ऐ जाते हुए लम्हों !
मुझको भी साथ में ले लो
तुम संग मैं भी मिल लूंगा
अतीत के मीठे सपनों से
खो जाऊंगा मैं फिर से
बिखरी-बिखरी जुल्फों में
उन खुशबू वाली सांसों में
एहसास अलग होता था
मैं भूल जाता था सबकुछ
जब पास में वह होता था
ऐ लम्हों जरा ठहरो !
चलने दो संग में अपने
जो अधूरे रह गये सपने
पूरे करने दो, संग चलने दो…
ऐ जाते हुए लम्हों…!!
Comments
4 responses to “ऐ जाते हुए लम्हों…!!”
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“ऐ जाते हुए लम्हों !मुझको भी साथ में ले लो तुम संग मैं भी मिल लूंगा
वाह , बेहद लाज़वाब अभिव्यक्ति-

आपका बहुत बहुत आभार गीता जी
जो आप हमेशा मेरा हौसला बढ़ाती हो
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अतिसुंदर भाव
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आभार आपका सुंदर टिप्पणी हेतु
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