4 Comments

  1. वाह जी वाह।        
    हर रोज कुछ और निखरते जाते हो,वक़्त की आड़ में कितना संवरते जाते हो,
    काजल,लाली, बिंदिया, मेहंदी सब बेजरूरत से रह गये,
    सब पूँछते है तुम ये कैसे करते जाते हो।

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