7 Comments

  1. रंगने नहीं आया
    सांवरिया मुझको ए सखी !
    मैं बैठी हूं पलके बिछा कर
    आया ना सखि साजन मोरा!
    सब खेले गुलाल पिचकारी
    मैं बैठी हूं कोरी- कोरी
    जिसके रंग में रंगना चाहूँ
    वह ना आया हो गई दोपहरी..

    बहुत ही सुंदर विरह गीत

Leave a Reply