ऐ दोस्त, आंख से ओस की बूंदें न गिराना ,
हम देखना चाहें फ़कत तेरा मुस्कुराना ,
अश्क आएं तो कह देना उनसे..
यहां तो है किसी और का ठिकाना
ओस की बूंदें
Comments
14 responses to “ओस की बूंदें”
-
लाजवाब करती बेहतरीन पंक्तियाँ। भावों की इस गहराई को सैल्यूट है। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।
-
सुन्दर समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया सतीश जी।
आप बहुत प्रेरणादायक समीक्षा करते हैं। अभिवादन🙏
-
-
सुंदर
-
धन्यवाद भाई जी 🙏
-
-

Very nice lines, great
-
Thank you very much chandra ji🙏
-
-

बड़ी लाजवाब रचना
-
बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
-
-

बहुत सुंदर पंक्तियां
-
धन्यवाद आपका प्रतिमा जी
-
-

वाह, बेहद सुंदर
-
Thanks for your pricious complement.
-
-

लाजवाब
-
Thank you very much Indu ji🙏
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.