ओ लेखनी ! सुन बात मेरी ( हाईकु विधा से अलंकृत )

जापानी विधा:- हाईकु कविता
—————————————
**************************
—————————————-

ओ लेखनी ! सुन बात मेरी
लिख अब दीन हीनों का दर्द तू
बढ़ चल कर्म पथ पर…

रह अडिग और बन सबल
भेद सारे खोल दे मन के तू
भाव सारे बोल दे अब…

पथिक को रस्ता दिखा कर
युवा को दिला कर जोश – उत्साह भर
सच सदा तू लिखती रहे…

ओ लेखनी ! सुन बात मेरी
निश दिन तू तप कर भाव में
निखरती रहे यह दुआ है…

Comments

6 responses to “ओ लेखनी ! सुन बात मेरी ( हाईकु विधा से अलंकृत )”

  1. Geeta kumari

    ओ लेखनी ! सुन बात मेरी
    लिख अब दीन हीनों का दर्द तू
    __________ दीन जनों का दर्द लिखने को आतुर प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर कविता

    1. धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूँ

  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

Leave a Reply

New Report

Close