Haiku

mob lynching

फेक न्यूज़ और सोशल मीडिया के सहारे, हमारा ही फैलाया है ये सारा अफवाहतंत्र वोट बैंक और सत्ता के बहाने, ढूंढ लेती है मुनाफे उसमे राजतन्त्र निहत्थे और बेक़सूर इंसान को, बिन अपराध के ही मौत दे देती है भीडतंत्र और फ़िर हिंदु मुस्लिम गाते हुए, एक दूसरे पर इल्जाम लगाते हुए कूद पड़ती प्रजातन्त्र फ़िर से फेक न्यूज़ और सोशल मीडिया के सहारे !! »

तुम्हारा तोता

पंछी हूँ उड़ना चाहता हूँ पिंजरे में कैद हूँ इक आज़ाद आसमां चाहता हूँ माना घर में सुरक्षित हूँ पर खुद का बनाया घरौंदा चाहता हूँ जो तुम चाहो वही बोलता हूँ खुद की भी आज़ाद जुबां चाहता हूँ यहाँ ख़ामोशी में रहता हूँ पर साथियों का शोर चाहता हूँ »

सहेलियाँ

रह जाती हैं स्कूल की सहेलियाँ स्कूल तक, कॉलेज की सहेलियाँ कॉलेज तक और पड़ोस की सहेलियाँ मायके तक बहुत ही मुश्किल है सहेलियों का साथ रहना दादी नानी बनने तक »

रंगीन सरोवर

जो लेके आओगे तू बाल्टी मैं भी रखूँगा सरोवर तैयार। रंगों से नहाएंगे साथ साथ यार।। »

नसीहत

राम कह लो या कह लो तू श्याम। जब तक मन शांत नहीं तेरा सुन वावरे ना हीं सुख ना हीं शांति ना हीं मिलेगा आराम।। »

मयस्सर

वो मयस्सर नहीं हुए जिंदगी में तो हम मौत तक उनका इंतज़ार करते रहे।।। »

धैर्य

निश्चित छोड़ अनिश्चित को धावे । मुट्ठी से निश्चित खोवे अनिश्चित हाथ न आवे । “विनयचंद “धैर्य बिना क्या पावे? »

घर: एक मंदिर

हे लक्ष्मी तुम कितनी चंचला हो? खुद भी नहीं ठहरती एक जगह पर और औरों को भी भटकाती। घर से दफ्तर जाकर भी भटके भर दिन गाँव नगरऔर इधरोधर फिर भी बाक बाण छेदे छाती। झल्ला के घर को आया बैठी थी दुर्गा दरवाजे आसन लगाकर शीश चूम मुख माथे सहलाती। आँगन में बैठी काली रूप आव भगत से दुखरे को लेती हर मधुर शब्द कह स्वरा बहलाती। मिल जाए नव तन मन “विनयचंद ” रे सब सुख बसे जहाँ पर वो दुनिया बस घर कहलाती। »

निरखत बाल मुकुंदा

काली कम्बली काँधे पर शोभित अरुण अधर अरुणाभ कपोल श्याम रंग मुखचंदा विनयचंद नित निरखत बाल मुकुंदा।। »

सर्दियाँ

याद करना कभी तीस साल पहले क़ी सर्दियाँ बिस्तर से ना निकलने की कभी होती थी मार्जियाँ. याद करना कभी तीस साल पहले की सर्दियाँ स्कूल से छुट्टी मरने के लिए खूब लगाते थे अर्जियाँ. याद करना कभी तीस साल पहले की सर्दियाँ रजाई मे ही पड़े रहते और खूब खेलते थे पर्चियाँ. याद करना कभी तीस साल पहले की सर्दियाँ वो सुहाना मौसम अब कहाँ ना जाने अब कहाँ गई वो इतनी ठंडी सर्दियाँ. »

धूप

धूप,आज कुछ, सरक आयी, मेरे आंगन में…. और, बिखेर गई, मुठ्ठी भर अबीर…… …. कविता मालपानी »

कलाकार

सालो से भीख मांगती भिखारन सोचती मेरे नसीब मे ये ही सही. पेट की ना सही पर दिल की आवाज़ सुनी तो सही. भिखारन कहकर सालो तक दुत्कारा आज कलाकार कहकर पुकार तो d सही. »

Green leaf

Autumn comes, leaf falls Enter spring, new hope occurs Green leaf new life calls. »

हाइकु

हथेली पर सपनों की घड़ियाँ साकार नहीं। नदी के पार रेत के बडे़ टीले हवा नाचती। अशोक बाबू माहौर »

हाइकु

हथेली पर सपनों की घड़ियाँ साकार नहीं। नदी के पार रेत के बडे़ टीले हवा नाचती। »

अच्छे दिन…!

अच्छे दिन…! अच्छे लोग तो खुश हो ही रहे हैं अच्छे दिनों से ..!. आशा बहुत अच्छा जो हो रहा है और भी होगा…! बुरे लोगों के बुरे दिन आये हैं बरबादी के …! ना सुधरेंगे फंसे हुए जो हैं ये घूस लेकर …! सजा मिलेगी लूटा देश जिन्होंने उन्हें जरूर ..! देश भक्ति के दिन अब आये हैं खुशहाली के ..! ” विश्वनंद” An attempt at Haiku in Hindi (5,7,5). »

Reason of failure…….

“Sometimes the reason of failure is not a attention, infact it might be consideration too””……! -Dev Kumar »

Quote-Love……

“Love is nothing, just a emotion or feelings of Heart……! -Dev Kumar »

Quote…….

“Age is nothing just a game of number”…….! -Dev Kumar »

पंछी

उडता पंछी नील गगन फैला विशाल हाथ। »

कोई शिकवा नहीं है

कभी रुलाया है, तो कभी हंसाया भी है, जिन्दगी तुझसे कोई शिकवा नहीं है, कभी खोया है, तो कभी पाया भी है »

सुरमा लगाया था आँखों

सुरमा लगाया था आँखों में जिसका नज़रें मिलते ही खफा हो गए »

रिश्ते तो अब बौने हो गए है

रिश्ते तो  अब बौने हो गए है ख्वाब तो बस बिछोने हो गए है »