तुम कितनी भोली हो बाला
तेरा कितना रूप निराला
मीठी-मीठी बातों से
तुम मुझको रोज रिझाती हो
सुबह होते ही तुम जाने कहाँ
गुम हो जाती हो !
सांझ होते ही मैं
तुम्हारी प्रतीक्षा करने लगता हूँ
क्योंकि तुम अपने साथ
यादों का सैलाब ले आती हो
ओ सजीली, रंगीली निशा !
तुम मुझको बहुत ही भाती हो…
ओ सजीली रंगीली निशा !
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3 responses to “ओ सजीली रंगीली निशा !”
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Tq
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सुंदर
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