कब तक रहोगे यूं मायूस तुम !
जब आयेगे दुल्हन बनकर तो
कहाँ जाओगे
रूबरू होंगे जब हम तुम्हारे
तो बाहुपाश में आ ही जाओगे…
कब तक रहोगे यूं मायूस तुम
Comments
5 responses to “कब तक रहोगे यूं मायूस तुम”
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बहुत खूब
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सुंलर
सुंदर -
बहुत खूब
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बहुत सुंदर
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क्या बात है प्रज्ञा!
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