कमाल

लड़ते लड़ते ज़माने की रीतिरिवाजों से थक गया हूँ,
मगर कमाल ये ही की मैं अब भी किताब पढ़ता हूँ।।
राही (अंजाना)

Comments

3 responses to “कमाल”

  1. राम नरेशपुरवाला

    सुन्दर

  2. राम नरेशपुरवाला

    वाह

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