कर्जा

कर्जा लेने की प्रथा, बहुत बुरी है जान
कर्जा में डूबे और, तड़प तड़प दी जान
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कर्जा ऎसा भार है, नहीं उतारा जाय
दो पल की खुशियां मिले, जीवन भर पछताय

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2 responses to “कर्जा”

  1. कर्जा लेने की प्रथा पर तंज कसती पँक्तियाँ 

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