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  1. गरीबी के अथाह सागर से पार करनेवाली नौका केवल परिश्रम ही है..पर गरीबी के हालात के आसूं एक कवि हृदय ही समझ सकता है..आपने कविता में उस वेदना को शव्दों मे वयाँ किया.. भावपूर्ण कविता…

  2. कर्मठता ही जीवन है ,इस सच्चाई को प्रस्तुत करती हुई कवि सतीश जी की बेहद शानदार रचना ।गरीब हो या अमीर परिश्रम के बिन सब बेकार है , परिश्रम ही सुखी जीवन का सार है । कविता में कवि ने जरूर एक गरीब परिवार का उदाहरण दिया है लेकिन परिश्रम तो मध्यम वर्ग और अमीर वर्ग सभी करते हैं । बहुत ही शानदार कविता बेहतर शिल्प और खूबसूरत प्रस्तुति

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