कर्म कर तू कर्म कर

कर्म कर
तू कर्म कर
कर्म पथ से ना तू भटक
दिशाएं भले विपरीत हों
बोये पथ में शूल हों
ना तू डर और ना हिचक
कर्म कर तू कर्म कर |

Comments

6 responses to “कर्म कर तू कर्म कर”

  1. Satish Pandey

    सुन्दर कविता

  2. उम्दा प्रस्तुति

Leave a Reply

New Report

Close