कलाई पर मौली और माथे पर रोली लगाया करती हैं

कलाई पर मौली और माथे पर रोली लगाया करती हैं,

बहनें छोटी हैं मेरी मगर बातें बड़ी ही बनाया करती हैं,

चुप रहती हैं कभी मुख से कुछ भी माँगा नहीं करती हैं,

के बांधकर राखी हर बार वो मेरी आयु बढ़ाया करती हैं।।

राही (अंजाना)

Comments

One response to “कलाई पर मौली और माथे पर रोली लगाया करती हैं”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह बहुत सुंदर रचना

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