कुछ ऐसा लिखो कि
लोग तुम्हें पढ़ें
पढ़कर मन के भीतर
नयी चेतना के बीज उगें।
कुछ ऐसा लिखो कि
सार्थक हो, शुद्ध हो
तभी कविता कहेगी
कि तुम प्रबुद्ध हो।
पहले साहित्य पढ़ो
तब लिखो,
लिखो तो ऐसा लिखो
कि सच्चे कवि दिखो।
कविता आत्मा की आवाज है
सीख कर नहीं होती,
लेकिन भाषा सीखनी होती है,
भाषा के बिना
कविता नहीं होती।
मन के भीतर की संवेदना
बाहर तभी निकलेगी
जब आपके पास
शब्दों का भण्डार होगा,
अन्यथा सब बेकार होगा।
कविता आत्मा की आवाज है
Comments
12 responses to “कविता आत्मा की आवाज है”
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कविता के विषय में सुन्दर कविता
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सादर धन्यवाद सर
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अति सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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वाह वाह क्या बात है!!!!!
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सादर धन्यवाद
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“पहले साहित्य पढ़ो , तब लिखो” अति उत्तम सलाह हम जैसे नए लेखकों के लिए।
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धन्यवाद अनुज, खूब आगे बढ़ो
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Sir जी जबरदस्त
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धन्यवाद जी
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Good
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Thanks
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