मौत के बाद क्या है
किसी ने जाना नहीं है
प्रकृति को क्यों
किसी ने पहचाना नहीं है
आखिर मृत्यु के रहस्य को
ईश्वर ने क्यों छिपाया
इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं है ||
क्यों नहीं बन पाया
वो दूसरा चांद तारा
क्यों नहीं बना दूजा ,सूर्य सा सितारा
बरमूडा ट्राएंगल का ,रहस्य क्यों न सुलझा
कैलाश पर्वत पर क्यों
कोई चढ़ पाया नहीं है
इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं है ||
क्यों नहीं बनी दूजी नदियां
क्यों नहीं बना दूजा समुन्दर
क्यों नहीं बनी हवाएँ ,खिलती हुई घटाएं
इंसान मृत व्यक्ति को
क्यों जिला पाया नहीं है
इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं है ||
जीव एक बार चला गया ,यहाँ फिर नहीं है आना
फिर न कोई अपना है ,न कोई बेगाना
अकेले है आना ,अकेले है जाना
जीवन मरण का रहस्य ,कोई जान पाया नहीं है
इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं है ||
पढ़ लिख कर सब अपना करियर बनाते
जीवन सुरक्षा के लिए पॉलिसी कराते
अगले जन्म का करियर कैसे बनेगा
कोई क्यों सोंच पाया नहीं है
इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं है ||
‘प्रभात ‘ ईश्वर को न हिन्दू ,न मुसलमान चाहिए
भगवान को सिर्फ एक नेकदिल इंसान चाहिए
मन्दिर न चाहिए ,न उसे मस्जिद चाहिए
धरती को स्वर्ग बना दे ,उसे ऐसा व्यक्तित्व चाहिए
बड़ी बड़ी बातें करने वाला
रक्त भी बना पाया नहीं है
इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं है ||
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.